इनसे बचिए… नहीं तो पाँव गंदे हो जाएंगे

दुनिया में मनुष्य की शक्ल में तरह-तरह के प्राणी हैं. कोई अपने-आप में मस्त रहने वाला है तो किसी को तांक-झाँक करने में मज़ा आता है. कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें बात का बतंगड़ बनाने में मज़ा आता हैं. कुछ महापुरुष ऐसे हैं जिन्हें पीठ पीछे शिकायत करने में मज़ा आता हैं. चाहे-अनचाहे हर किसी का ऐसे लोगों से पाला पड़ता ही रहता हैं. आप जितना भी इन चीज़ों से भागने की कोशिश कर लें, पर भाग नहीं सकते. ऐसे नमूने किरदार अपनी करतूतों में आप को लपेट ही लेंगे.

जिगना ने रेडीमेड गारमेंट्स शॉप खोली तो उसके बगल में टीना जो ब्यूटी पार्लर चलाती है उसके पेट में दर्द होने लगा. टीना के पेट दर्द की वजह जिगना की दुकान नहीं बल्कि खुद जिगना थी. टीना के पास मोहल्ले की लगभग सभी औरतें आकर बैठा करती हैं सिर्फ जिगना को छोड़कर. जिगना अपने काम में मस्त रहती हैं. सुबह-सुबह बच्चों को तैयार करके स्कूल भेजना, फिर अपने हस्बैंड के लिए नाश्ता और ऑफिस के लिए लंच तैयार करना. पति के ऑफिस जाने के बाद नहाना-धोना और फटाफट कुछ नाश्ता करके भागती हुई अपनी शॉप पर आना, यही रूटीन था जिगना का.

रेडीमेड गारमेंट्स शॉप में एक सिलाई मशीन भी रख रखी थी, जिसमें दिन भर में एक दो कपड़ें भी सिल डालती थी. दिन भर उसे अपनी शॉप से ही फुर्सत नहीं होती कि वह कहीं अगल-बगल जाए. टीना जो दिन भर खाली बैठी रहती थी अपने पार्लर में, कभी-कभी टाइमपास के लिए जिगना की शॉप पर आ जाती थी. लेकिन जिगना उसे वक्त नहीं दे पाती थी. जिसका नतीजा हुआ टीना और भी ज़्यादा नाराज़ रहने लगी.  उसे जिगना की व्यस्तता से जलन होने लगी.

टीना के पार्लर में अधिक बातें जिगना की चलने लगी. एक-आध कस्टमर कोई आती भी थी टीना उससे पूछने लगती कि वे भी तो कहीं जिगना की शॉप से खरीदारी नहीं करतीं. कोई कह भी दें कि हाँ अपने कपड़े वह जिगना की शॉप से ही लेती है तो टीना कहती थी “अरे तुम कैसे लेती हो उसकी शॉप से कपड़ें, क्योंकि उसकी शॉप के सभी कपड़ों में शिकायतें आती हैं. कई कस्टमर्स तो उसकी शॉप में उसके बेचे हुए कपड़ों को वापस फेंक कर चले जाते हैं. कुछ लोग तो उसके मुँह पर ही कह डालते हैं कि आपके कपड़े थर्ड क्वालिटी के हैं”.

टीना के दुष्प्रचार करने की वजह से कुछ कस्टमर ने जिगना के शॉप आना बंद कर दिया, और कुछ ऐसे भी थे जो टीना की ऐसी नकारात्मक बातों को सुनकर टीना उल्टा टीना से ही नाराज़ हो गए और उसके पार्लर जाना बंद कर दिया. कुछ लोग ऐसे भी थे जो जिगना से बताने लगे कि “टीना तो बहुत बेकार औरत है, वह आपकी शॉप के बारे में ऐसा बोल रही थी”.

धीरे-धीरे नतीजा क्या हुआ ? टीना के पार्लर में अच्छी क्वालिटी के कस्टमर्स का जाना बंद हो गया, और जिगना की शॉप और भी बेहतर चलने लगी. जानते हैं क्यों ?

बहुत आसान हैं.

उदारहरण के लिए ऐसे समझ लें कि किचन में खाना बनाया जाता है, क्रिकेट नहीं खेलते . टीना का पार्लर बंद होने के पीछे भी कुछ ऐसी ही वजह थी. टीना का अधिक ध्यान अपने पार्लर में नहीं बल्कि जिगना की शॉप में रहने लगा. वह हर कस्टमर से जिगना की बुराई करने लगी जिसका सीधा फायदा जिगना को होता गया. लोगों ने जिगना से कहा भी कि वह टीना से कुछ बोलती क्यों नहीं ! जिगना का जवाब होता था “टीना जी ने पार्लर शायद मेरी बुराई करने के लिए खोला है इसलिए उनका पूरा ध्यान मेरी बुराई करने में लगा रहता हैं और मैंने अपने कस्टमर्स के लिए शॉप खोली है… आपके लिए… इसलिए मेरा पूरा ध्यान अपनी शॉप में ही रहता है… मैं सिर्फ फिक्र करती हूँ अपने कस्टमर्स की और अपने काम की”. जिगना की ऐसी बातें सुनकर हर कोई प्रभावित होने लगा और उसकी दुकानदारी बढ़ती ही गयी.

इस कहानी का सार यही हैं कि आप अपना काम करते रहें. अगर कोई आपके पीठ पीछे आपकी बुराई करता हैं तो उसे करने दें. रोक-टोक बिल्कुल भी न करें, क्योंकि वही उसका काम हैं. जब तक वह किसी की निंदा ना कर ले उसका खाना हज़म नहीं होगा. ऐसे लोगों को इग्नोर करते रहें. ज़िन्दगी एक रास्ता है… रास्ते पर मुसाफिरों का आना-जाना चलता रहेगा. मुसाफिरों के उस कारवाँ में कुछ लोग ऐसे भी मिलेंगे जिनकी खुशबू से जीने का मज़ा बढ़ जाएगा और कुछ ऐसे भी लोग मिलेंगे जिनसे बदबू आएगी… उनकी सोच की गंदगी की बदबू… यह चलता रहेगा. आपको किसे अपनाना है यह आपकी चॉइस पर निर्भर करता है.

जिगना को कई लोगों ने सुझाव दिया कि उसे टीना से जाकर बात करनी चाहिए, उससे पूछना चाहिए कि क्यों वह हमेशा उसकी बुराई करती रहती हैं… क्यों उसकी दूकान का दुष्प्रचार करती है … पर जिगना कभी पूछने नहीं गयी. हो सकता है कि शायद वह टीना से डरती हो. हो सकता है वह टीना से उलझना न चाहती हो… या यह भी हो सकता है कि वह इस सिद्धांत पर चल रही हो कि ‘झूठे का मुँह काला और सच्चे का बोलबाला’. शायद वह जानती थी कि उसके कपड़ों की क्वालिटी अच्छी है तो टीना को जवाब उसके कस्टमर्स से ही मिल जाएगा. यह भी हो सकता है कि टीना की बुराई करने पर जिगना ध्यान ही नहीं देना चाहती थी. हो सकता है टीना जैसी गन्दी मानसिकता वाले लोगों से जिगना दूर रहना चाहती हो, शायद वह जानती थी कि गंदगी में घुसने पर खुद के ही पैर गंदे होंगे.

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