गर्भपात के घरेलु उपाय in Hindi. Garbhpat ke gharelu upay in Hindi

 गर्भपात के घरेलु उपाय जान लें, क्योंकि एबॉर्शन करवाना आम बात होती जा रही है. गर्भ ठहरने के बाद अधिकतर महिलायें गर्भपात के घरेलु उपाय अपनाना पसंद करती हैं. गर्भपात के घरेलु उपाय विशेष रूप से अनचाहे गर्भ को छुपाने के लिए किये जाते हैं. गर्भपात के घरेलु उपाय तब किये जाते हैं जब गलती से गर्भ ठहर जाए. वैसे शायद ही कोई महिला होगी जो माँ बनने का सुख नहीं प्राप्त करना चाहेगी. लेकिन कई बार हालात ऐसे बन जाते हैं कि ना चाहते हुए भी गर्भपात करवाना मजबूरी बन जाती है.

सच मानिये तो एबॉर्शन किसी भी रूप में हो, लेकिन अच्छी बात नहीं है. क्यों न पहले से ही सतर्क रहें. बच्चा नहीं चाहने पर प्रेग्नेंट होने की नौबत ही ना आने दें. शारीरिक सम्बन्ध की उमंग, एक सज़ा में न बदल जाए इसलिए कॉन्डम की आदत डालें. हमेशा यही कोशिश करनी चाहिए कि गर्भपात की नौबत न आये.

गर्भपात क्यों करवाया जाता है ?

गर्भपात के घरेलु उपाय करने की वजह सिर्फ यही नहीं होती कि महिला अभी माँ नहीं बनना चाहती. गर्भपात करवाने के पीछे या गर्भपात के घरेलु उपाय के पीछे कई वजह हो सकते हैं. कभी-कभी गर्भावस्था के दौरान स्थिति ऐसी बन जाती है कि गर्भपात ही एकमात्र विकल्प बचता है. गर्भ ठहरने से बचने के कई वजह हो सकते हैं. कई बार डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर या अन्य स्वास्थ्य समस्या की वजह से महिलायें गर्भ धारण नहीं करना चाहती हैं.

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कुछ लोगों के साथ आर्थिक समस्याएं भी गर्भपात की एक वजह बन जाती है. कुछ स्थितियाँ ऐसी भी होती हैं जहाँ बिन ब्याही माँ बनने का डर होता है. सम्बन्ध बनाने के वक्त हुई लापरवाही की वजह से गर्भ ठहर जाता है. कई बार सम्बन्ध बनाते वक्त कॉन्डम फट जाता है, या अन्य किसी कारण से गर्भ ठहर जाए तो, इस अनचाहे गर्भ से बचने का गर्भपात ही एक मात्र विकल्प होता है.

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गर्भपात कब कराना चाहिए

अगर एबॉर्शन मजबूरी है. आप किसी मजबूरी में चाहती हैं गर्भपात करना तो इस बात का ध्यान ज़रूर रखें कि प्रेगनेंसी के 2-3  महीने के अंदर ही गर्भपात करा लें. डॉक्टर्स के अनुसार 3 महीने के बाद गर्भपात करवाना खतरनाक हो सकता है. तीसरे महीने के बाद गर्भपात कराने में जान जाने का डर बना रहता है. यह भी ध्यान रखें कि गर्भपात बार-बार नहीं कराना चाहिए. बार-बार गर्भपात कराने से भविष्य में गर्भ धारण करने में समस्या हो सकती है. इसलिए गर्भ ना ठहरे इसका ध्यान पहले से ही रखना बेहतर होगा.

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अनचाही प्रेगनेंसी से बचने के लिए गर्भ निरोधक का इस्तेमाल करें. पार्टनर के साथ सम्बन्ध बनाते वक्त अगर कॉन्डम का इस्तेमाल करें तो इससे बेहतर कुछ भी नहीं है. कुछ पल की मस्ती भविष्य के लिए समस्या न बन जाए इसलिए सम्बन्ध बनाने से पहले ही सतर्क हो जाएँ. कॉन्डम का इस्तेमाल करना हमेशा बुद्धिमानी है.

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एबॉर्शन से होने वाले नुक्सान

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एबॉर्शन कराने की चाहे जो भी वजह हो, इससे होने वाले शारीरिक नुक्सानों को ज़रूर जान लें. यह समझ लें कि एबॉर्शन हमेशा जोखिम भरा होता है. एबॉर्शन के बाद हेवी ब्लीडिंग का डर होता है. किसी-किसी महिला को लगातार ब्लीडिंग होने की भी शिकायत रहती है. बच्चेदानी में इन्फेक्शन होने की सम्भावना होती है. स्तनों में सूजन या दर्द की समस्या हो सकती है. इसलिए बेहतर यही होगा कि असुरक्षित सम्बन्ध बनाते ही गर्भपात के घरेलु उपाय कर लें. गर्भ ठहरने की नौबत ही ना आने दें. फिर भी गर्भ ठहर जाए तो ध्यान रखें कि सिर्फ तीसरे महीने तक एबॉर्शन को सुरक्षित माना गया है. तीसरे महीने के बाद एबॉर्शन करना खतरे से खाली नहीं है क्योंकि तीसरे महीने तक भ्रूण अच्छी तरह स्थापित हो चूका होता है. स्थापित भ्रूण को बाहर निकालना पीड़ा दायक प्रोसेस होता है.

पहचानें प्रेगनेंसी के लक्षणों को

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गर्भपात के घरेलु उपाय करने से पहले गर्भ ठहरा है या नहीं यह जान लें. प्रेगनेंसी को समझने के लिए प्रेगनेंसी के कुछ लक्षण दिए गए हैं, इन लक्षणों से आपको समझने में मदद मिलेगी कि गर्भ ठहरा भी है या नहीं.

प्रेगनेंसी के लक्षण

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  • स्‍तनों में भारीपन – गर्भ ठहरने के बाद स्‍तनों में भारीपन महसूस होने लगता है. इस वजह से इन में सूजन या कड़ापन भी आने लगता है. स्‍तनों के आकार में परिवर्तन, स्‍तनों में नसों का फूलना और निपल्‍स के आसपास के हिस्‍से में पहले से अधिक कालापन आना.
  • जी मिचलाने की समस्‍या – प्रेगनेंसी की अवस्था में उल्टी जैसा महसूस होने लगता है. अधिक खट्टा या अधिक मसालेदार, चटपटा खाने की इच्छा होना.
  • बार-बार पेशाब आना – पहले की अपेक्षा अचानक अधिक पेशाब आने लगी हो. खासकर गर्भ धारण के छठे से आठवे सप्ताह से ऐसा होने लगता है.
  • कब्ज़ होना – प्रेगनेंसी में कब्‍ज़ की शिकायत होना स्वाभाविक है.
  • अधिक थकान होना – प्रेगनेंसी के एक हफ्ते बाद ही बहुत अधिक थकान महसूस होने लगती है. खासकर सुबह के समय की थकान और आलस महसूस होना प्रेगनेंसी का एक प्रमुख लक्षण है.
  • साँस लेने की परेशानी – साँस लेने में परेशानी होना या सीढियाँ चढ़ते वक्त साँसों का फूलना.
  • तापमान सामान्य से अधिक होना – अचानक से महिला के शरीर का तापमान बढ़ना. ब्लड प्रेशर का बढ़ना या घटना.
  • खाने से अरूचि होना – खाने में अरुचि होना भी प्रेगनेंसी के मुख्य लक्षणों में से एक हैं. हर वक्त चटपटा या खट्टा खाते रहने की इच्छा होना.
  • मूड में बदलाव – बात-बात में चिड़चिड़ापन जैसा व्यवहार करना या रह-रह कर मूड बदलना.
  • पीठदर्द की समस्या – प्रेगनेंसी के शुरआती दौर में पीठ दर्द की समस्या होना भी सामान्य बात है.
  • सिर दर्द होना – बार-बार सिरदर्द होना प्रेगनेंसी की निशानी हो सकती है.
  • माहवारी का रुक जाना – मासिक धर्म का रुक जाना प्रेगनेंसी के लक्षण हो सकते हैं.
  • प्रेग्‍नेंसी टेस्‍ट का पॉज़िटिव होना – प्रेगनेंसी की अवस्था जानने के लिए प्रेग्‍नेंसी टेस्‍ट सबसे बेहतर तरीका है.

गर्भपात के घरेलु उपाय

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  • अनार भी गर्भपात के घरेलु उपायों में से एक है, इसलिए अनार खूब खाएँ.
  • प्रेगनेंसी को रोकने के गर्भपात के घरेलु उपाय में पपीता भी एक अच्छा विकल्प है. गर्भावस्था की शुरुआत में कच्चा पपीता खाने से गर्भ गिरने की सम्भावना बढ़ जाती है.
  • गर्भपात के घरेलु उपाय में अनानस एक अच्छा विकल्प है. अनानास खाने से या अनानास का जूस पीने से गर्भपात में सहायता मिलती है.
  • दालचीनी से भी गर्भपात में सहायता मिलती है, ध्यान रखें दालचीनी का अधिक सेवन नुकसानदायक भी हो सकता है.
  • भुने हुए काले तिल को गुड़ या शहद के साथ खाएँ. बेहतर होगा इसे सुबह या रात में ही खाएँ.
  • तुलसी का जूस या काढ़ा पीने से गर्भपात की सम्भावना बढ़ जाती है. तुलसी का सेवन अधिक मात्रा में न करें.
  • गर्भपात के घरेलु उपाय करने में दिन भर में 3-4 बार Green tea भी पी सकते हैं. Green tea बनाते वक्त इसमें अदरक और निम्बू का रस डाल दें तो और भी अच्छा है.
  • रुई के पौधे की जड़ भी गर्भपात के घरेलु उपाय में से एक है. इसका काढ़ा बनाकर दिनभर में दो या तीन बार पी सकते हैं.
  • बाजरे की रोटी भी गर्भपात के घरेलु उपाय में एक नुस्खा है.
  • लहसुन भी प्रेगनेंसी ख़त्म करने की दवा है. लहसुन की 3-4 कली सुबह-सुबह खाना पीरियड लाने का घरेलु नुस्खा है.
  • कहा जाता है कि सीता फल के पीसे हुए बीज योनी में मलने से गर्भपात में सहायता मिलती है.
  • गर्भपात के घरेलु उपाय में निम्बू और संतरे के रस भी सहायक होते हैं.

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गर्भपात के घरेलु उपाय पर निर्भरता

गर्भपात के घरेलु उपाय in Hindi

गर्भ ठहरने पर गर्भपात के घरेलु उपाय ज़रूर करें. गर्भ ठहरने से बचने के लिए गर्भपात के घरेलु उपाय कारगर होते हैं, फिर भी कन्फर्मेशन के लिए प्रेगनेंसी टेस्ट ज़रूर कर लें. प्रेगनेंसी टेस्ट पॉजिटिव होने पर डॉक्टर से सम्पर्क करना न भूलें. भविष्य की समस्यायों से बचने के लिए प्रारंभिक अवस्था में ही डॉक्टर से संपर्क कर लें. एबॉर्शन के लिए गर्भपात के घरेलु उपाय पर ही निर्भर न रहें.

 

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