गर्भावस्था के लक्षण Garbhavastha ke Lakshan

Garbhavastha ke lakshan : गर्भावस्था के लक्षण कई होते हैं. गर्भावस्था या गर्भपात की जानकारी सभी दंपत्ति को होनी चाहिए. गर्भावस्था की उचित जानकारी के अभाव में अक्सर बहुत से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है. आजकल जहाँ गर्भावस्था एक तरफ खुशियों की सौगात है. वहीं यह दूसरी तरफ परेशानियों की एक वजह भी है. गर्भावस्था के लक्षण की जानकारी के अभाव में बाद में समस्या हो सकती है.

आज समाज की बदलती हुई सोच में हर दंपत्ति एक या दो बच्चे ही चाहता है. वजह है बढ़ती हुई जनसँख्या और बढ़ती हुई मंहगाई. इस मंहगाई के दौर में भी हर दंपत्ति चाहता है कि वे अपने बच्चों को एक अच्छी शिक्षा और बेहतर ज़िंदगी दे सके. इसी वजह से एक या दो बच्चे के बाद लोग गर्भावस्था या गर्भधारण से डरने लगे हैं.

वैसे तो गर्भावस्था के शुरुआती लक्षणों से पता लग जाता हैं कि महिला गर्भवती हैं या नहीं. गर्भावस्था के प्रारंभिक दौर में ही महिला के शरीर में कई तरह के बदलाव शुरू हो जाते हैं. फिर भी कई बार महिलाएं शुरूआती समय में प्रेगनेंसी के लक्षणों को समझ नहीं पाती. अधिकतर महिलाओं को अगली मासिक रुकने तक पता ही नहीं लग पाता है कि वह गर्भ धारण कर चुकी हैं. जिस तरह हर महिला की शारीरिक बनावट अलग होती है उसी तरह हर महिला के प्रेगनेंसी के लक्षणों में भी विभिन्नताएं होती हैं. इसलिए महिलाओं को इन शुरूआती लक्षणों की जानकारी होनी चाहिए.गर्भावस्था के लक्षण

गर्भावस्था और स्‍तनों में भारीपन  

स्‍तनों में सुबह-सुबह भारीपन महसूस होना एक नार्मल लक्षण है. गर्भ धारण के बाद महिलाओं में हार्मोन लेवल बदलने लगते हैं. हार्मोन लेवल में बदलाव होने के वजह से ब्रैस्ट हैवी महसूस होने लगता है. ब्रैस्ट के हैवी होने के वजह से इसमें सूजन या कड़ापन भी आने के चांसेज रहते हैं. स्‍तनों के आकार में परिवर्तन होने की वजह से निपल्‍स के आसपास के हिस्‍से में पहले से अधिक कालापन आ जाता है. फिर स्‍तनों में नसों का फूलना आदि गर्भावस्था के लक्षण हैं. ऐसी स्थिति होने पर घबराएं नहीं धीरे-धीरे ब्रैस्ट अपने सामान्य रूप में आ जाते हैं. कुछ दिनों के बाद अगर इस स्थिति में सुधार नहीं आने पर डॉक्टर से संपर्क करना बेहतर होगा.

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गर्भावस्था में उलटी आना

गर्भावस्था के शुरूआती दिनों में सबकुछ विपरीत लगने लगता हैं. इस अवस्था में सुबह की शुरुआत कष्टदायी होता हैं. जी मिचलाने की समस्‍या सबसे ज्‍यादा होती है. कुछ भी खाने पर उल्टी जैसा महसूस होने लगता है. हर वक्त ऐसा महसूस होता है जैसे अब वोमिट होने वाली हैं. कभी-कभी कमजोरी जैसा भी महसूस होने लगता हैं. उलटी या कमजोरी जैसी समस्या दिनभर में कभी भी महसूस किया जा सकता हैं. वैसे अधिकतर महिलाओं में ऐसी समस्या सुबह के समय ही देखने को मिलते हैं. इस तरह की समस्याएं चौथे से छठे हफ्ते में शुरु होती है. प्रेग्‍नेंसी के छठे महीने के बाद धीरे-धीरे यह समस्या कम होने लगती हैं. प्रेग्‍नेंसी के दौरान अगर ऐसी समस्याएं हो तो घबराएं नहीं, क्यों यह नार्मल हैं. जी मिचलाना या सुबह में कमजोरी महसूस होना गर्भावस्था के सामान्य लक्षण हैं.

garbhavastha ke lakshan

प्रेग्‍नेंसी के दौरान जी मिचलाने जैसी समस्या से निपटने के लिए महिलायें अचार खाना पसंद करती हैं. महिलायें खट्टे फलों की तलाश में रहने लगती हैं. हर वक्त जी करता है कि खट्टे फल या खट्टे अचार खाते रहें. जी मिचलाने की समस्या में खट्टे फल या खट्टे अचार खाना नार्मल है. वोमिट वाली फीलिंग्स को दूर करने के लिए खट्टे फल या अचार खाएं लेकिन यह आपके सेहत के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है. अधिक खट्टा खाना या अधिक मशाला खाना आपके गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए बिलकुल भी ठीक नहीं होगा. अधिक खट्टा या अधिक मशाला आप दोनों के सेहत को नुक्सान पहुंचाने के लिए पर्याप्त है. इसलिए ऐसी समस्यायों से निपटने के लिए ऐसे नुक्सानदायी चीजों से बचें. ऐसी परेशानियां जब अधिक होने लगे तो डॉक्टर से संपर्क करना बेहतर होगा.

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गर्भावस्था के लक्षण

अधिक पेशाब आना

तुरत-तुरत पेशाब का आना भी गर्भावस्था के लक्षण हैं. शुरूआती दिनों में पेशाब बार – बार आती है. अधिक पानी पिने से भी पेशाब बार – बार आती है. अधिक ठन्डे मौसम में भी पेशाब तुरत-तुरत आती रहती है. रह-रह के पेशाब आने की वजह डॉयबिटीज भी हो सकती है. इसलिए गर्भावस्था का अनुमान लगाने के लिए बेहतर तरीका है कि अगर पहले के अपेक्षा अचानक अधिक पेशाब आने लगे हो तो समझना चाहिए यह गर्भ धारण के वजह से हो सकते हैं. गर्भ धारण के दौरान महिलाओं का शरीर अतिरिक्‍त तरल पदार्थ उत्‍पादित करने लगता है. गर्भ धारण के दौरान किडनी ज्यादा सक्रिय हो जाती हैं, जिससे बार-बार टॉयलेट आती रहती है. खासकर गर्भ धारण के छठे से आठवे सप्ताह से ऐसा होने लगता है. यही वजह है गर्भावस्था के बाद सामान्य से अधिक बार पेशाब के.

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गर्भावस्था में कब्ज होना

कब्ज की शिकायत भी गर्भावस्था के लक्षण हो सकते हैं. गर्भधारण के दौरान हार्मोन में परिर्वतन होने लगते हैं. हार्मोनल परिर्वतन के वजह से भोजन आँतों में धीरे धीरे पास होता है. इस वजह से महिला के पाचन क्रिया पर भी इसका असर होने लगता है. पाचन क्रिया पर होने वाले इस असर के वजह से पेट फूलने लगते हैं. ऐसी स्थिति में कब्‍ज की शिकायत होना स्वाभाविक है.

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गर्भावस्था और अधिक थकान होना

गर्भावस्था के लक्षण

थकान भी गर्भावस्था के लक्षण है. पहले के अपेक्षा अचानक अधिक थकान होने की वजह गर्भधारण भी हो सकता है. गर्भधारण के एक हफ्ते बाद ही बहुत अधिक थकान महसूस होने लगता है. खासतौर पर सुबह के समय का थकान, एक प्रमुख लक्षण है. इस दौरान महिलायें सामान्य से अधिक लेटना पसंद कर सकती हैं. हर वक्त सोने की इच्छा होती है. थकान के वजह से आलस आना भी निश्चित है. कभी-कभी कमजोरी के वजह से भी थकान आने लगती है. ऐसी स्थिति में घबराएं नहीं, ऐसा कुछ दिनों तक ही होगा. धीरे-धीरे फिर से आप पहले की तरह ही फुर्तीला हो जाएंगी. प्रेगनेंसी में ऐसा ब्लड में शुगर लेवल कम होने के कारण होता है. यह एक सामान्य प्रक्रिया है.

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गर्भावस्था में साँस लेने की परेशानी

पहले के अपेक्षा अचानक से सांस लेने में परेशानी होने लगे तो ऐसी अवस्था गर्भावस्था के लक्षण भी हो सकती है. सीढियाँ चढ़ने या कुछ दूर तेज चलने मात्र से ही साँस फूलने लगे तो ऐसी स्थति की वजह गर्भ धारण की सम्भावना भी हो सकती है. इस अवस्था के शुरूआती दिनों में साँस लेने में कुछ परेशानी हो सकती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पेट में पल रहे भ्रूण को ऑक्‍सीजन की आवश्‍यकता होती है. यह परेशानी धीरे-धीरे बढ़ती ही जाती है.

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गर्भावस्था के लक्षण

गर्भावस्था और शरीर का तापमान बढ़ना

इस अवस्था के दौरान शरीर का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है और अधिकतर महिलाओं में यह परेशानी लम्बे वक्त तक रहती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इस अवस्था में ब्लड प्रेशर बढ़ता और घटता रहता है.

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गर्भावस्था में खाने से अरूचि होना

खाने में अरुचि होना भी गर्भावस्था के लक्षण हैं. इस अवस्था में शरीर के हारमोन्‍स में परिवर्तन होने लगते है. इस वजह से खाने की रुचि लगभग समाप्त हो होने लगती है. कुछ भी खालो पर किसी भी चीज का स्वाद अच्छा नहीं लगता. थोड़ा बहुत कुछ खा लेने से ही पेट भर जाता है. चटपटा या खट्टा खाने की चाहत धीरे-धीरे बढ़ने लगती है.

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प्रेग्‍नेंसी टेस्‍ट का पॉज़िटिव होना

गर्भावस्था के लक्षण

इन सभी लक्षणों में अगर संदेह हो तो प्रेग्‍नेंसी टेस्‍ट जरूर कर लेना चाहिए. प्रेग्नेंसी टेस्ट के लिए ज़रूरी नहीं है कि डॉक्टर के पास या किसी हॉस्पिटल ही जाएँ, इस टेस्ट को घर पर बहुत आसानी से किया जा सकता है. इसके लिए ज़रूरत होती है एक ट्यूब की जो किसी भी दवा दूकान पर बहुत आसानी से मिल जाता है. इसकी कीमत भी बहुत कम होती है. इस ट्यूब को इस्तेमाल करने के लिए सुबह की पहली पेशाब की दो बूंदें इस पर डालनी होती है. इसमें नेगेटिव या पॉजिटिव रिज़ल्ट का निशान बना होता है. इसे इस्तेमाल करने की विधि इसमें हिंदी भाषा में भी लिखी होती है. इसे इस्तेमाल करने से पहले अच्छी तरह पढ़ लेने से आसानी होगी.

गर्भावस्था में माहवारी का रुक जाना

माहवारी का रुक जाना सभी लक्षणों में एक मुख्य लक्षण है. किसी महिला की माहवारी अगर नियमित रहती है लेकिन इस बार आने में देर हो रही है तो बेहतर होगा टेस्ट करवा लें. टेस्ट अगर खुद से की जा रही है तो दो बार कर लें. कई बार ऐसा देखा गया है कि टेस्ट गलत भी होता है. टेस्ट गलत होने का नतीजा निश्चित रूप से हानिकारक ही होगा. बाद में किसी तरह की परेशानी न हो इसलिए टेस्ट कमसे कम दो बार जरूर कर लें. यह भी ध्यान रखें कि ऐसी अवस्था में पेशाब करते हुए हल्के गुलाबी या भूरे रंग के दाग भी देखे जा सकते हैं.

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गर्भावस्था में मूड बदलना

अब तक हम जान चुके हैं कि प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में हार्मोन का स्तर तेज़ी से बढ़ने लगता है. हार्मोन के बढ़ने के कारण मनोदशा प्रभावित होने लगती है. अचानक से बार-बार विचारों में बदलाव आने लगते हैं. व्यहार में बदलाव आने लगते हैं. बात-बात पर चिड़चिड़ापन होने लगता है. सोच नकारात्मक होने लगती है. मन में तरह-तरह के अच्छे-बुरे ख्यालों का आना प्रेग्‍नेंसी के शुरूआती लक्षणों में से एक है.

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गर्भावस्था के लक्षण

गर्भावस्था के दौरान पीठदर्द

इस अवस्था के शुरआती दौर में पीठ दर्द की समस्या सभी लक्षणों में से एक लक्षण है. जिस महिला को पहले कभी भी इस तरह की समस्या नहीं रही है और अचानक ऐसा होने लगे और बार-बार हो तो यह गर्भ धारण का प्रमाण भी हो सकता है.

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गर्भावस्था में सिर दर्द होना

गर्भावस्था के लक्षण

सिर दर्द भी गर्भावस्था का लक्षण हो सकता है. गर्भावस्था में हार्मोन में परिर्वतन होने लगता है, इस वजह से कुछ महिलाओं को सिर दर्द की शिकायत होने लगती है. यह गर्भावस्था के प्रारंभिक लक्षणों में से एक है. दर्द सहने योग्य हल्का हो तो दवा का सेवन करने से परहेज करें, यह धीरे-धीरे खुद ही ठीक हो जाता है.

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