प्यार से तुम पिया संग रहना, सारे सुख दुःख संग संग सहना

हो बनके आशा की झिलमिल किरण, अपने साजन का घर जगमगाना

हो सात फेरो के सातो वचन, प्यारी दुल्हनिया भूल न जाना

कितना अच्छा गाना है ये.

है न !

सही मायने में सिर्फ गाना ही नहीं, मैं तो मानता हूँ मैरिड कपल के लिए एक बहुत अच्छे संदेश है.

 

हमारे अपार्टमेंट के एक फ्लैट में एक खूबसूरत मैरिड कपल रहते थे. नीता सहाय और नमन सहाय (बदला हुआ नाम). दोनों अपनी पैथलैब चलाते थे.  हस्बैंड जितना हैंडसम उतने ही झगड़ालू और दुस्ट. वाइफ हंसमुख, मासूम और गंभीर. उनकी शादी को हुए करीब सात वर्ष हो चले थे, पर ये सात वर्ष उनके लिए सात नर्क से कम नहीं रहे.

हर दिन उनके बीच झड़प होना डेली रूटीन सा बन गया था. बीच में तो ऐसा भी वक्त आया, जब नीता सहाय को अपने मायके में करीब साल भर रहना पड़ा. किसी को उम्मीद नहीं था कि वो अब फिर से एक साथ रह पाएंगे. सब ने ये मान लिया था कि इनकी अब तलाक ही होगी. नमन सहाय को बहुत समझाने के बाद, अपनी पत्नी को उसके मायके से लाने को तैयार हुआ. सबको लगा था कि साल भर कि जुदाई के कुछ फायदे होंगे. लेकिन सब कुछ वैसा ही होने लगा जैसा पहले होता था, दिन-रात की चिक-चिक.

एक दिन उनके फ्लैट के बगल वाले फ्लैट में एक नए किरायदार आये. हस्बैंड शांतनु बनर्जी करीब ४५ का और वाइफ मोनिका बनर्जी २०-२२ की होगी जो बेहद खूसूरत और मिलनसार थी. कुछ ही दिनों में वो अपार्टमेंट की सभी औरतों से काफी घुलमिल गयी. उस के लिए एंटरटेनमेंट का एक ही साधन था – दूसरी फैमिली की बुराई करना, एक घर से दूसरे घर में घुसना, बिन बुलाये मेहमान बनके किसी के भी घर में २-२ घंटे चिपके रहना, औरतों को एक-दूसरे से लड़ाना.

धीरे-धीरे अपार्टमेंट की औरतें उसे इग्नोर करने लगे.

अब वो सहाय फैमिली तक ही सिमित रहने लगी. सहाय फैमिली की लड़ाइयों का पंचायत करना. सहाय फैमिली और उनका खाना-पीना हर रोज साथ-साथ होने लगा. करीबी इतनी बढ़ गयी की दोनों परिवार एक हो गए.  शांतनु बनर्जी अपने घर में हो या ना हो पर मोनिका और नमन दिन-रात साथ रहने लगे. नमन सहाय हर वक़्त बनर्जी कपल के साथ दिखने लगें. अब बिज़नेस पूरी तरह से नीता सँभालने लगी थी. कभी-कभी नमन अपने फ्लैट में घुसते भी थे तो अपनी पत्नी से सिर्फ लड़ने के लिए.

 

कुछ दिन बाद मोनिका के समझाने पर नमन अपने लेबोटरी जाने लगें और नीता अब अपने घर में रहने लगी. बनर्जी के यहाँ अब एक नए मेहमान  शांतनु बनर्जी के फैक्ट्री का सह कर्मी कोई गुप्ता आने लगा, जिसकी उम्र करीब २८-२९ का होगा. जब तक नमन अपने लेबोटरी में होता था तब तक उसके घर में गुप्ता और बनर्जी फैमिली नीता के साथ रहते थे. करीब महीने भर बाद पता लगा की सहाय की तलाक हो रही है और नीता अब गुप्ता से शादी करने वाली है. ये खबर मेरी पत्नी जी काफी घबराई हुई सुनाई थीं. इस खबर के बाद शायद नीता से भी अधिक मेरी पत्नी जी चिंतित रहने लगीं.

 

एक दिन

पत्नीजी : देखिये कुछ भी करके ऐसा होने से रोक लीजिये. बेचारी नीता बहुत भोली है… पता नहीं बनर्जी का क्या प्लान है ! कौन है गुप्ता ? इनके चक्कर में नीता को नहीं आना चाहिए. कुछ भी करके रोक लीजिये.

 

बुरा तो मुझे भी लग रहा था. नमन की बेवकूफी की सजा, नीता को मिलने जा रही थी. मुझे भी बनर्जी और गुप्ता के इरादे पर शक हो रहा था. मैंने पत्नीजी से कहा की वो खुद नीता को ऐसा करने से रोके, उसे समझाए. मेरी नमन से या नीता से कभी भी कोई बात चित नहीं हुई थी, हाए – हेलो भी नहीं. ऐसे में, इतने गंभीर विषय पर उनसे अचानक बात करना उल्टा पर जाता.

बहुत सोचने के बाद एक आईडिया आया.

 

मैं अगले दिन हेल्थ चेकअप के बहाने उनके लैब में गया. नीता अकेली उदास बैठी थी. हमने एक – दूसरे को गुड़ मॉर्निंग किया.

मैं : भाभीजी, भाई साहब आज लैब नहीं आये क्या ?

नीता (मुस्कुराते हुए) :  नहीं आज उन्हें कहीं जाना पड़ गया.

मेरे लिए ये अच्छी खबर थी. मुझे तसल्ली हुई की चलो कुछ इत्मीनान से बाते कर सकता हूँ. नमन के सामने उनके व्यक्तिगत मामले में कुछ भी कहना मेरे लिए मुश्किल था.

मैंने बात की शुरुआत अपने हेल्थ चेकअप और उनके रेट्स से की.

नीता भी बताने लगी की किस टेस्ट में क्या-क्या जानकारी दी जाती है और उसके रेट्स क्या है. इसके बाद अपनी एक जरूरी ईमेल चेक करने के बहाने नीता से उसका लैपटॉप माँगा जो मिल गयी. मुझे वहां रुकने की एक वजह मिल गयी थी. लैपटॉप पर लगा रहा, और नीता से बातें चलने लगीं.

मैं : भाभीजी, ये लैपटॉप कुछ स्लो है !

नीता : हाँ, शायद वायरस के वजह से.

मैं : अब तो आपको नए लैपटॉप की जरुरत पड़ेगी.

नीता : नहीं ये तो छोटी सी प्रॉब्लम है. एंटीवायरस डालने से या फॉर्मेट करने से स्पीड सही हो जायेगी.

मैं : हाँ ये सही रहेगा. पर जब तक ठीक न हो जाए, आपको तो इसपे काम करने में बहुत परेशानी होती होगी. है न !

नीता : काफी दिनों से स्लो है. अब तो इसकी आदत बन गयी है. हमें तो पता भी नहीं लगता अब कि ये स्लो है.

मैं : हाँ, जब प्रॉब्लम रेगुलर होने लगे तो हमें उसकी आदत बन जाती है.

नीता : हाँ…

मैं : ये बात तो हमारी ज़िन्दगी पे भी लागू होती है न !

 

नीता कुछ नहीं बोली.

 

मैं : भाभीजी, कंप्यूटर में प्रॉब्लम हो तो एंटी वायरस या फॉर्मेटिंग से ठीक हो जाएगा, अगर यही प्रॉब्लम हमारी लाइफ में होने लगे तो ?

नीता : (गहरी सांस लेते हुए) लाइफ कि प्रॉब्लम के लिए भी कोई एंटीवायरस काश बनी होती.

मैं : अभी आपने कहा कि वायरस इन्फेक्टेड कंप्यूटर चलाते-चलाते आपको आदत हो गयी है और इसके स्लो होने का अब आपको पता भी नहीं लगता. फिर ज़िन्दगी के प्रोब्लेम्स में ऐसा क्यों नहीं लागू होता है ? हमें तो लाइफ की भी प्रोब्लेम्स झेलते-झेलते आदत बन जाने चाहिए.

नीता : प्रोब्लेम्स की साइज चलने लायक हो तो चलाये ही जाते हैं. जब यही साइज बढ़के चुभने लगे तो ज़िन्दगी नर्क बन जाती है.

 

मैं कुछ नहीं बोल सका.

कुछ देर के लिए सन्नाटा.

 

मैं : भाभीजी, एक बहुत अच्छी मैसेज मैंने पढ़ी थी. हमारी ज़िन्दगी में दो ही विकल्प होते हैं – एक्सेप्ट या चेंज. आपकी ज़िन्दगी आपको जो भी दे उसे एक्सैप्ट कर लो, अगर एक्सेप्ट नहीं कर सकते तो उसे चेंज कर डालो. मेरे हिसाब से तो एक्सेप्ट करना ही बुद्धिमानी है क्योंकि ये हमारा वर्तमान है और चेंज हमेशा भविस्य होता है, और भविस्य हमेशा अनिश्चित है.

 

वो मुझे कुछ देर देखती रही, फिर अचानक उसकी आँखें डबडबा गयी. वो समझ चुकी थी कि मैं उसे क्या कहना चाह रहा हूँ.

 

नीता : क्या-क्या एक्सेप्ट करूँ… एक साधारण औरत हूँ मैं, एक्सेप्ट करने की एक लिमिट है. हमारे संस्कार और सभ्यता एक दायरे में रहना सिखाते हैं हमें. पर एक्सेप्ट करने के लिए इन दायरों को भी तोड़ चुकी हूँ मैं, ये सोचके कि चलो ज़िन्दगी में कैसे भी शांति बनी रहे. पर जितने ही आगे बढ़ती हूँ मेरे हस्बैंड को कम ही लगता है.

 

बात अब खुल चुकी थी, मेरे लिए और भी आसान हो गया था.

 

मैं : भाभीजी, मोनिका से नमन कि बहुत अच्छी बनती है. आप मोनिका से काफी खूबसूरत और अधिक योग्य हैं फिर भी ऐसा… कुछ समझ नहीं पा रहा हूँ.

नीता : नमन को एक औरत से जो भी अपेक्छाएं है, वो सभी बातें मोनिका में है. जो मोनिका है वो मैं नहीं बन सकती.

मैं : कुछ समझा नहीं..

नीता : नमन को ब्लू फिल्म कि तरह पार्टनर चाहिए.  मोनिका और उसके हस्बैंड, वो सब करते हैं जो नमन को बहुत पसंद हैं.

मैं (झिझकते हुए) : आप क्यों नहीं कर सकती ?

नीता : क्या मतलब हैं आपका ? ऐसी ज़िन्दगी जीने से बेहतर हैं मर जाना. मैं जो कुछ भी कर सकती हूँ, वो सिर्फ अपने हस्बैंड के लिए, और करती भी आयी हूँ. नमन के लिए बदलना भी सीख गयी थी मैं. बन गयी थी उसकी पोर्न स्टार. हद तो तब हो गयी जब उसकी डिमांड होने लगी कि मैं दूसरे कपल्स के साथ भी एन्जॉय करूँ. उसकी घटियापन से तंग आ गयी हूँ, उसे झेलना अब मेरे बस की नहीं हैं.

 

समस्या सचमुच बहुत जटिल थी. कुछ समझ नहीं पा रहा था कि अब मुझे क्या करना चाहिए.

 

मैं : भाभीजी, आप दिल से कहना. आप अधिक स्मार्ट हो या नमन ?

 

नीता (अपनी आंसू पोछती हुई) : मैं स्मार्ट होती तो ज़िन्दगी जहन्नुम नहीं बने होते.

 

मैं : ज़िन्दगी जहन्नुम आपके वजह से बनी हैं क्या ?

 

कोई जवाब नहीं.

मैं : भाभीजी, एक पति-पत्नी की ज़िन्दगी, सुख-दुःख सब एक होते हैं. ज़िन्दगी अगर जहन्नुम बनी हैं तो सिर्फ आपकी नहीं, बल्कि नमन की भी. उसकी गृहस्ती उजरने जा रही हैं. आप तो उसे छोड़कर किसी और से शादी करके घर बसा लेंगी पर उसका क्या होगा ?

 

नीता : कोई फर्क नहीं पड़ता उसे. वो तो यही चाहता हैं कि मैं उसे छोड़ दूँ.

 

मैं : भाभीजी, अपनी आखें खोलिये. आप क्यों नहीं समझ पा रही हैं कि मुर्ख इंसान हैं वो… और उसकी मूर्खता आप जैसी समझदार, शिक्षित पर भी भारी पड़ गए. इसमें गलती आपकी हैं. नमन जैसे को कण्ट्रोल करना आपके लिए बहुत आसान हैं. उसकी कमजोरी आपको पता हैं, और आपकी खूबसूरती के सामने मोनिका कहीं भी नहीं टिकती. आपको स्ट्रांग बनने की जरूरत नहीं हैं वो तो आप पहले से ही हैं, सिर्फ खुद को पहचानिये और देखिये कैसे चुटकी में ये नमन, मोनिका जैसे लोग लाइन पे आते हैं.

 

नीता : अब कुछ भी नहीं हो सकता. मैं काफी आगे बढ़ चुकी हूँ.

मैं : मतलब ?

नीता : मोनिका और शांतनु मुझपे नमन से अलग होने के लिए दबाव बनाने लगे. उनका कहना था मैं उनमे शामिल हो जाऊं या नमन को भूल जाऊं. क्योंकि नमन पुरे तरह से उनके चंगुल में आ चूका है. गुप्ता को मैं बहुत पसंद हुं, वो मेरे लिए कुछ भी कर सकता है. मैं गुप्ता से शादी कर लूँ फिर उसके हाथों ही मोनिका और शांतनु को बर्वाद करवाउंगी.

मैं : समस्या आपकी है. इसे आपको ही सुलझाना होगा. ये मोनिका और शांतनु का असर आपकी ज़िन्दगी पे कैसे पर सकता है ! दूर फेंकिए ऐसे लोगों को अपनी ज़िन्दगी से. आप का घर सिर्फ आपका है, नमन मानसिक रूप से बीमार है, उसकी इलाज के लिए आपको छल का भी सहारा लेना पड़े तो आप लो.

मैं : भाभी जी, आप एक पैथोलोजिस्ट हैं. लोगों की बीमारियां पहचानना आपका पेशा है. मुझे उम्मीद है आप इन संस्कारहीन लोगों का इलाज ढूंढ लेंगी. आपको जरुरत है सिर्फ एक बार अपने वायरस इन्फेक्टेड सिस्टम को फॉर्मेट मारने की. नमस्ते.

 

नीता के दोनों हाथ मुझे नमस्ते करने को उठे पर कुछ बोल नहीं पायी. मुझे देखती रह गयी, और मैं वहां से निकल आया.

 

कुछ दिनों बाद पता लगा कि नीता माँ बन गयी है, लड़का हुआ है. नमन बहुत खुश था. इस ख़ुशी के मौके पर पुरे अपार्टमेंट को पार्टी दिए गए, मैं भी पत्नीजी के साथ गया था. नीता मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी. उसने इशारों में मुझे नमस्ते कहा. बहुत खुश लग रही थी. मैं पार्टी में आये लोगों कि तरफ देखा तो सभी नज़र आ रहे थे पर बैनर्जी फॅमिली कही भी नहीं दिख रहे थे, सुनने में आया कि वे अपार्टमेंट छोड़ गए हैं.

 

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