कहने को तो हम सभी एक-दूसरे से प्यार करते हैं. लेकिन क्या हमें सचमुच एक-दूसरे से प्रेम है? हम प्रेम करते है या सिर्फ चाहते हैं? क्योंकि दोनों बिल्कुल ही अलग है. अब जहाँ तक इसे चाहने की बात है. तो छोटे बच्चे को भी प्रेम चाहिए अपनी माँ से. बच्चा जब कुछ बड़ा हो जाए तो स्नेह चाहिए घरवालों से. कुछ और बड़ा हो जाए तो पति को प्यार चाहिए पत्नी से, या पत्नी को प्यार चाहिए अपने पति से. और चाहत के अनुसार जब नहीं मिल पाता तो दुःख होना स्वाभाविक है.

अब ये दुःख क्यों ?

शायद इसलिए क्योंकि हर कोई प्यार और स्नेह की चाहत रखता है. मगर करता कोई नहीं. हर कोई सिर्फ मिलने की उम्मीद रखता है. अब मिले तब न जब कोई किसी से करें. पर हर कोई सिर्फ मिलने की चाह रखता है. जब मिलने की उम्मीद नहीं रह जाती है तो इन्वेस्टमेंट के रूप में हम कुछ प्रेम को अपने दिल की तिजोरी से निकालते हैं. इस उम्मीद में कि बदले में कहीं प्यार मिल जाए. हो सकता है, जितना दिए जा रहें हैं उससे कुछ अधिक. अब अगर सामने वाले से प्रेम मिलने भी लगे. तो क्या पता यह उसका भी इन्वेस्टमेंट हो, कि चलो कुछ चाहिए तो पहले देना होगा. फिर मिलेगा.

है न !

प्रेम

आप ध्यान देना इस बात पर. आपको लगेगा हर इंसान सिर्फ चाह रहा होता है. यही चाहत खासकर कपल्स के बीच दुःख और कलेश की वजह है. अधिकतर मैरिड कपल्स के बीच कोम्प्रोमाईज़ का सम्बन्ध है. क्योंकि जब शादी हो गयी है तो निभाना ही होगा. क्योंकि शादी निभाने के लिए ही किये जाते हैं. मतलब सम्बन्ध में दिल का रिस्ता नहीं, महज सामाजिक जिम्मेदारी है बस. क्योंकि हम सब प्रेम मांगते हैं, देना कोई भी जानता नहीं है. दुनिया में हस्बैंड-वाइफ के संबंध अच्छे होने का एक ही रास्ता है. हम यह समझें कि प्रेम दिया जाता है. मांगा नहीं जाता. सिर्फ दिया जाता है.

अक्सर देखे गए हैं कि कपल्स के बीच खुशहाली है. क्योंकि उनका सेक्सुअल लाइफ सुखद है. वाइफ अपने हस्बैंड से संतुस्ट है. क्योंकि हस्बैंड उसके मन के मुताविक उसकी वासना की संतुष्टि करने में सक्षम है. भरपूर सेक्स का आनंद अपने पति से लेकर खुश है. कुछ वही हालत पति के भी हैं. उसकी पत्नी उसके मुताविक हर तरह की सेक्सुअल प्लीजर उसे दे रही. पति को सेक्सुअल आनंद उसके मन के मुताविक मिल रहे होते है. इसलिए वह भी अपनी जिंदगी में गदगद है. दोनों ही एक-दूसरे से खुश हैं. क्योंकि दोनों को एक-दूसरे से भरपूर आनंद मिल रहे होते हैं. मिल इसलिए रहे होते हैं, क्योंकि वह दे रहा है. अगर देना बंद कर दे. उसके बाद भी मिलें. इस बात की उम्मीद करना महज़ धोखा है.

Selfless Love

पर सेक्स और प्यार दोनों एक ही हैं क्या? एक ही नहीं हो सकते… कभी नहीं हो सकते. पर फार्मूला दोनों में ही एक जैसे ही हैं. दोगे तो मिलेगा. मजे दो और मजे लो. मन के मुताविक, वह सबकुछ करेगी, जो उसका पति उससे चाह रखता है.

सबकुछ.

पर प्रेम का क्या?

जब वासना की भूख शांत हो जायेगी. उसके बाद क्या सामाजिक बंधन को निभाने के लिए ही साथ रहेंगे? आप यह भी कह सकते हैं कि जब दोनों एक-दूसरे से खुश हैं. तो उनके बीच अच्छे सम्बन्ध होना स्वाभाविक है. प्रेम खुद हो जाएंगे दोनों में. बिल्कुल सही बात है. सेक्स में बहुत पावर है. इस सेक्स की शक्ति को, इस सेक्सुअल एनर्जी को ही मोहब्बत में परिवर्तित किया जा सकता है. मान लिया ऐसा हो भी सकता है और होता भी है.

पर जिस रिश्ते में सेक्स के सम्बन्ध ना हो वहां?

love quotes

माँ अपने बच्चे से प्रेम करती है. भाई-बहन एक दूसरे से करते हैं. एक दोस्त अपने दोस्त को करता है. इन रिश्तों में सेक्स तो कहीं भी नहीं है! फिर यह कैसे मान लें कि सेक्सुअल एनर्जी को ही मोहब्बत में परिवर्तित किया जा सकता है.

है न!

अब देखिये इन रिश्तों में सेक्स नहीं है. फिर भी प्यार है. एक दे रहा है तो दूसरा भी बदले में लौटा रहा है. एक के तरफ से प्यार बंद तो दूसरे के तरफ से भी बंद.

फिर प्रेम को निःस्वार्थ कैसे कह सकते हैं?

एक दे रहा है इस स्वार्थ में कि बदले में उसे भी प्यार मिलेगा. मैं प्रेम से लिखता हूँ, इसलिए आप भी प्रेम से पढ़ते हैं. प्रेम निःस्वार्थ होता है, ऐसा मैं नहीं मान पा रहा हूँ. अगर आपकी कोई लॉजिक है इस विषय पर तो जरूर बताये.

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