ब्लाइंड डेट क्या है… इसे शुरू करने और सफल बनाने के सरल टिप्स

ब्लाइंड डेट की बढ़ती लोकप्रियता की वजह युवाओं की बदलती मानसिकताएँ हैं. समय के साथ-साथ बदलाव होना भी स्वाभाविक है. इसी वजह से कुछ रिश्तों की शुरुआत ब्लाइंड डेट के रास्ते से गुज़रने लगे हैं. जहाँ एक तरफ रिश्तों का दायरा ऑफलाइन से ऑनलाइन होता जा रहा है वही दूसरी तरफ रिश्तों में विश्वास और भावनाओं की डोर कमज़ोर होती जा रही है. वैसे रिश्तों का कमज़ोर पड़ना लाज़मी है जिनका आधार ही ब्लाइंड डेट हो. बिखराव ही उन रिश्तों का अंजाम है जिनकी शुरुआत ही ब्लाइंड डेट के अन्धकार से हो.

भावनाओं का कितना महत्व है ब्लाइंड डेट जैसे सम्बन्ध में यह व्यक्ति विशेष पर निर्भर करता है. किसी भी रिश्ते में एहसास का आभास उसके जुड़ाव पर निर्भर करता है. ब्लाइंड डेट जैसे मिलन में भावनाओं की तरंगें अगर मज़बूत हो तो निःसंदेह रिश्ते के जुड़ाव में मज़बूती आती है, लेकिन जब भावनाएँ महज़ आकर्षण की बहती हवा में लेहराएँ तो उसके वज़ूद का हवा में ही विलीन होना तय है.

तो क्या किसी रिश्ते के ब्लाइंड डेट जैसे रोमांचक आधार कामयाब होते हैं ? ऐसे रिश्ते कितने सफल और असफल होते हैं ? इस तरह के रिश्ते की सफलता का कोई तरीका है, अगर है तो कौन सा नुस्खा है वह ? ब्लाइंड डेट को यादगार और रोमांटिक बनाने के क्या-क्या टिप्स हो सकते हैं ? अगर कोई टिप्स है तो क्या लड़के और लड़कियों के लिए एक समान टिप्स हैं ? कैसे मिलता है ब्लाइंड डेट पार्टनर और किस तरह इसकी शुरुआत की जाए ? ऐसे कई सवाल हैं जिनके जवाब हम तलाशते रहते हैं. इन सवालों के जवाब समझने के लिए यह समझना ज़रूरी है कि ब्लाइंड डेट होती क्या है ?

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ब्लाइंड डेट क्या है Blind Date in Hindi

ब्लाइंड डेट क्या है tips in hindi

टेक्नॉलोजी की बढ़ती उपलब्धता की वजह से इंसानों के दायरों में काफी बदलाव आये हैं. इंटरनेट क्रांति के आने से पहले लोगों का दायरा ऑफलाइन हुआ करता था, लेकिन उन ऑफलाइन दायरों का आकार और रूप काफी बड़ा और बिल्कुल स्पष्ट दिखने वाला होता था. लेकिन इंटरनेट के आने के बाद, इंटरनेट की बढ़ती उपलब्धता के साथ-साथ लोगों के दायरे भी ऑफलाइन से ऑनलाइन में बदल चुके हैं. कहने को तो ऑनलाइन दायरों का आकार बेहद विशाल है. इतना विशाल की दुनिया में हमारी पहुँच उँगलियों के इशारों तक सिमट चुकी है. इस वजह से अपनी दुनिया से अलग एक नयी दुनिया में हम खोते चले जा रहे हैं. उसी नयी दुनिया के भटकाव में कई रिश्ते मिलते रहते हैं. इन्हीं रिश्तों में से छन कर कुछ नए रिश्ते निकलते हैं जो ब्लाइंड डेट की सूरत में हमारे सामने आते रहते हैं.

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चूंकि ब्लाइंड डेट के पार्टनर्स की आपस में आभासी मुलाकातें होती रहीं हैं इसलिए एक-दूसरे से परिचित होने की सम्भावनाएँ रहती हैं लेकिन दोनों एक-दूसरे की सूरत से बिल्कुल अंजान रहते हैं. ब्लाइंड डेट पार्टनर्स को एक-दूसरे के विषय में उतनी ही जानकारी होती है जितना वे एक-दूसरे को इंटरनेट के माध्यम से बताते हैं. बिल्कुल ही अज्ञात व्यक्ति की इस पहली मुलाक़ात को ब्लाइंड डेट कहते हैं. दो अंजान व्यक्तियों के इस रोमांचक मिलन को ब्लाइंड डेट कहते हैं. यही वजह है कि इस तरह की मुलाक़ात को लेकर ब्लाइंड डेट पार्टनर्स को घबराहट और तनाव महसूस होता है. इस रोमांचक मुलाक़ात में भयभीत होना स्वाभाविक है क्योंकि उन्हें पता नहीं होता कि सामने वाला उनसे क्या उम्मीदें रखता है, पार्टनर के द्वारा क्या अपेक्षाएं की जाएंगी. एक विशेष रिश्ते की उम्मीद में दो अजनबी की इस पहली मुलाक़ात को ब्लाइंड डेट ही कहते हैं.

ब्लाइंड डेट कैसे होती है ?

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ऑफलाइन और ऑनलाइन, दोनों ही तरीके से ब्लाइंड डेट हो सकती है. ऑफलाइन डेटिंग के चांसेज़ कम रहते है. ब्लाइंड डेट की सम्भावना ऑनलाइन यानि इंटरनेट के माध्यम से अधिक रहती है. ऑफलाइन डेटिंग किसी दोस्त या रिश्तेदार के माध्यम से होती है. घरवालों या रिश्तेदारों के द्वारा किसी की शादी तय कर दी गयी है और शादी से पहले जोड़े एक-दूसरे से मिलते हैं इसे भी ऑफलाइन ब्लाइंड डेट कह सकते हैं. वर्तमान माहौल में अधिकतर ऑनलाइन डेटिंग ही होती है.

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विशेष रूप से युवा वर्ग का अधिक समय ऑनलाइन ही गुज़रता है ऐसे में सोशल साइट्स के माध्यम से या अन्य किसी माध्यम से इंटरनेट पर ऐसा कोई न कोई अक्सर मिल जाया करता है जिससे अच्छी दोस्ती हो जाती है. जब दोस्ती का असर गहरा होने लगता है तो बात मुलाक़ात तक पहुँच जाती है, इसी मुलाक़ात को ब्लाइंड डेट कहते हैं और ऑनलाइन ही बेहतर माध्यम है डेटिंग पार्टनर्स को ढूंढने का.

क्या ब्लाइंड डेट कामयाब होते हैं ?

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ब्लाइंड डेट की कामयाबी डेटिंग पार्टनर्स की भावनाओं पर निर्भर करती है. यह इस बात पर निर्भर करता है कि उनकी एक-दूसरे के साथ कैसी तालमेल है. दोनों एक-दूसरे से जो अपेक्षाएं रखते हैं उन अपेक्षाओं में एक-दूसरे की सहमति है भी या नहीं. उनकी पहली मुलाक़ात यानी फर्स्ट डेट के पहले दोनों ने जो एक काल्पनिक सूरत बनाई थी वह सूरत उनकी कल्पना से मेल खाती भी या नहीं. अगर उनकी कल्पना और यथार्थ में अंतर है तो इस अंतर को वे स्वीकार किस रूप में करते हैं. उनके ब्लाइंड डेट से सामने आया यथार्थ दोनों को स्वीकार है या किसी एक को. अगर एक को ही स्वीकार है तो इसकी सफलता पर संदेह की सम्भावनाएँ अधिक हैं लेकिन अगर दोनों ने ही एक-दूसरे को स्वीकार कर लिया तो उनकी स्वीकृति में भावनाओं की भूमिका अहम् मानी जाती है.

ब्लाइंड डेट को कामयाब बनाने के सरल टिप्स

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दो अंजान लोगों की मुलाक़ात कामयाब होगी या नहीं यह दोनों की पसंद-नापसंद पर निर्भर करता है. अगर डेटिंग पार्टनर्स की पसंद-नापसंद में भिन्नताएं हैं और एक का झुकाव दूसरे के प्रति है लेकिन दूसरे का झुकाव कुछ खास नहीं है, ऐसी अवस्था में डेटिंग को एक सफल डेटिंग बनाने के कुछ सरल टिप्स की मदद ली जा सकती है. इन टिप्स की मदद से ब्लाइंड डेट को एक रोमांटिक और सफल डेट बनाया जा सकती है.

  • जब आपको महसूस हो कि आपके झुकाव की अपेक्षा पार्टनर का झुकाव उदासीन है, ऐसी अवस्था में खुद को संयम रखें.
  • अपने उतावलेपन को पार्टनर के समक्ष ना दर्शाएँ.
  • बनावटीपन से बचें और आप जो हैं उसी रूप में पेशाएं.
  • अगर आपके प्रति डेटिंग पार्टनर का नीरस व्यव्हार है तो भी उदास होने के बजाय मुस्कुराहट को चेहरे पर बनाय रखें.
  • बातों के दरम्यान अधिक सुनना बेहतर होगा, क्योंकि जितना अधिक आप सुनेंगे उतनी ही अधिक सामने वाले को समझ पाएंगे.
  • डेटिंग पार्टनर में कोई कमी दिखने पर सलाह देने की भूल बिल्कुल न करें. ध्यान रखें कि बिन मांगें जो मिले उसका कम महत्व होता है.
  • डेटिंग पार्टनर के द्वारा अगर आपको कोई सलाह दी जा रही हो तो ध्यान से सुनें. एहसास कराएँ कि वह और उनकी बातें आपके लिए मूल्यवान है.

जब पार्टनर पसंद ना आए

ब्लाइंड डेट में डेटिंग पार्टनर से मिलने के बाद दो बातें होती हैं – पार्टनर पसंद आ जाता है या नहीं. अगर पसंद आ जाए, तब तो हम अपनी उत्सुकताएँ बनाए रखते हैं, लेकिन अगर नापसंद हुआ तो अनमने ढंग से उसके साथ कुछ समय गुज़ार कर वापस लौट आते हैं. है न ! अगर आप भी ऐसा करते हैं तो अपना नुक्सान कर रहे हैं. पार्टनर पसंद आए या न आए अपनी मौजूदगी का एहसास कराना ज़रूरी होता है.

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भले ही उसे देखने के बाद आपने निर्णय ले लिया हो कि उससे दुबारा नहीं मिलना है फिर भी सामने वाले की भावनाओं की क़द्र करना एक अच्छे व्यक्तित्व की पहचान है. उस नापसंद पार्टनर से दुबारा मिलना या न मिलना अलग बात है लेकिन क्या आप नहीं चाहेंगे कि वह आपको जब भी याद करें एक अदब के साथ याद करे, इसलिए जितना भी वक्त उनके साथ गुज़ारें पूरे दिल से गुज़ारें. दिलों का मिलना या ना मिलना और बात है, वक्त ने मिलाया है तो वक्त को खुशनुमां ही बनाए रखना बेहतर है.

पार्टनर पसंद आने पर कैसे यादगार बनाएँ ब्लाइंड डेट को ?

अगर डेटिंग पार्टनर पसंद है तो ज़रूरत है उसे इम्प्रेस करने की. आवश्यकता है इस फर्स्ट डेट को असरदार और यादगार बनाने की. ब्लाइंड डेट को असरदार बनाने के लिए पहले से ही तय कर लें कि किन विषयों पर बातें करनी हैं और किस विषय को नज़रअंदाज करना है. कोशिश यही करें कि जिस विषय-वस्तु पर आपको अधिक जानकारी हो उसी विषय पर आगे बढ़ें. यह तैयारी आपके लिए और आपकी तरफ से थी, अब आपको पार्टनर की दिलचस्पियों को भी ध्यान में रखना होगा. मान लीजिये आपने फिल्मों की बातें शुरू कर दी लेकिन आपको इस बात का एहसास होते ही कि वो फिल्मी बातों पर खुद से कुछ नहीं कह पा रहे हैं तो उन्हें बोलने का पूरा-पूरा मौका दें और समझें कि उनकी दिलचस्पी किन बातों में है, अगर उनकी दिलचस्पियों के क्षेत्र में आपकी जानकारी कम है तो आपका सुनते रहना ही बेहतर है.

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उनका अधिक बात करना दर्शाता है कि उनको आप में रूचि है. उनकी बातों को एक्टिव होकर सुनें भले ही बोरिंग सब्जेक्ट क्यों न हो. डेटिंग के लिए निश्चित समय से पहले पहुँचें. आपका उनसे पहले पहुँचना आपकी उनके प्रति उत्सुकता को दर्शाता है. हर किसी को पसंद आता है जब कोई उसका इंतज़ार करेँ और उसे महत्व दे. उनको देखकर अगर घबराहट हो रही हो तो यह घबराहट कुछ मिनटों के लिए ही है क्योंकि जैसे-जैसे आपका वक्त उनके साथ गुज़रता जाएगा आप सहज होते जाएंगे. आपके विषय में जो कुछ भी पूछा जाए उसका जवाब बेहद सामान्य लहज़े में दें, ना ओवर कॉंफिडेंट और ना ही डल नज़र आएं. सबसे ज़रूरी बात यह है कि अपनी वाणी और शब्दों पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि आपके मुँह से निकला एक असभ्य या कड़वा शब्द आपके व्यक्तित्व को धूमिल करने के लिए काफी होगा.

लड़कों के लिए विशेष टिप्स

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फर्स्ट डेट हो या ब्लाइंड डेट, डेटिंग पार्टनर्स में लड़के हमेशा शक की दायरे में होते हैं. लड़कियों का मासूम मन पहली मुलाक़ात में डरा हुआ होता है इसलिए अपने मेल पार्टनर के हाव-भाव पर उनकी विशेष नज़र होती हैं. पुरुष प्रधान समाज होने की वजह से उनमे असुरक्षा की भावना कूट-कूट कर भरी होती है. डेटिंग के नाम पर लड़कियों को ठगा जाता है, उनका शोषण किया जाता है.  ऐसी ही नकारात्मक बातें उन्हें मेल पार्टनर पर जल्दी भरोसा करने से रोकती हैं. उस भरोसे को हासिल करने के लिए उन्हें गलती से भी किसी एकांत जगह पर ना बुलाएँ. उनकी असुरक्षा की भावना को दूर करने के लिए, उनकी नज़दीकियाँ आपकी मदद करेंगीं. लड़कियाँ अपनी नज़दीकियाँ उनके साथ बढ़ाती हैं जहाँ खुशबू हो… जहाँ सुंदरता हो… पुरुषों का व्यक्तित्व ही उनकी खुशबू होती है. उनके शब्दों और व्यवहारों में ही सुंदरता झलकती हैं.

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लड़कियों के लिए ब्लाइंड डेट टिप्स

ब्लाइंड डेट क्या है tips in hindi

लड़कियों को ब्लाइंड डेट पर जाने से पहले इतनी जानकारी ज़रूर होनी चाहिए कि डेटिंग और फिज़िकल रिलेशन्स अलग-अलग होते हैं. ब्लाइंड डेट जैसी प्रथा वेस्टर्न कंट्रीज़ की देन है. हमारे समाज में यह प्रचलन अभी शुरूआती दौर में है, इसलिए इस विषय में बहुत से लोगों को आधी-अधूरी जानकारी है जिसका खामियाजा उनकी गलतियों से उन्हें चुकाना पड़ता है. डेटिंग का मतलब सेक्स नहीं है इसलिए ब्लाइंड डेट के लिए हमेशा पब्लिक प्लेस का ही चयन करें. अनजान व्यक्ति से मिलने के लिए जानी-पहचानी जगह सुरक्षा के दृष्टिकोण से अच्छी होती है. मीटिंग पॉइंट पब्लिक प्लेस में होने से डेटिंग में घबराहट भी नहीं होगी न किसी बात का डर. डेटिंग पार्टनर कौन है या कैसा है इसकी बहुत कम जानकारी आपको होती है. हो सकता है जितनी जानकारी आपको दी गयी है वह गलत भी हो. यानी डेटिंग पार्टनर एक बुरा इंसान भी हो सकता है.

ब्लाइंड डेट क्या है tips in hindi

ब्लाइंड डेट के लिए भीड़-भाड़ वाले रेस्टोरेंट सबसे अच्छा ऑप्शन है. मुलाक़ात रेस्टोरेंट में नहीं हो पा रही हो तो उसके लाए हुए कुछ भी खाने-पीने से परहेज़ करें. यह एक ब्लाइंड डेट है इसलिए अपने किसी भी रहस्य को साँझा ना करेँ. ब्लाइंड डेट में आँखें पूरी तरह खुली रखें. मुलाक़ात अजनबी से है, अपनों को इसकी खबर ज़रूर दें. पार्टनर की मीठी-मीठी बातों से उसकी मिठास का अनुमान लगाना बुद्धिमानी नहीं है. ब्लाइंड डेट में अभी सबकुछ ब्लाइंड है इसलिए किसी निर्णय पर जल्दी ना पहुँचे. डेटिंग पार्टनर हाव-भाव या व्यवहार से भले ही सभ्य हो फिर भी ध्यान रहे यह ब्लाइंड डेट है. ब्लाइंड डेट के प्रति हमारी नकारात्मक बातें डराने के लिए नहीं, आपकी सावधानी के लिए हैं. मौज-मस्ती चाहे ब्लाइंड डेट से हो या फॅमिली टूर से, सावधानी दोनों में ही ज़रूरी है.

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