Bhartiya Sanskriti भारतीय संस्कृति.

भारतीय संस्कृति की विशेषताएं Bhartiya Sanskriti Ki Visheshta

भारतीय संस्कृति की विशेषताएं दुनिया भर में प्रसिद्द है. उदारता, प्रेम और ज़िंदादिली की मिसाल है हमारी भारतीय संस्कृति. परम्पराओं और रीति-रिवाज़ों के तालमेल से बनी है हमारी भारतीय संस्कृति. अनेक भाषाएँ, धर्म, रंग-रूप और त्योहारों के फूलों से सजा हमारा भारत सचमुच सारे जहाँ से अच्छा है… अनेकता में एकता ही हमारी भारतीय संस्कृति की आत्मा है, और यही भारतीय संस्कृति की विशेषता है.

हमारी संस्कृति में धर्म, मोक्ष, काम और अर्थ का विशेष महत्व रहा है. इस देश की पहचान ही ऋषि-मुनियों से रहा है. विश्व भर में शांति का प्रतिक हमारा भारत सदियों से आकर्षण का केंद्र रहा है. सिकंदर जैसा विश्व विजेता भारत की धरती पर ही घुटने टेकने में मज़बूर हुआ था. न जाने कितने ही योद्धा और पराक्रमी अपनी बुरी नियत लिए आए और गए, लेकिन हमारी संस्कृति का वजूद को छू भी नहीं सके. नैतिकता और नैतिक मूल्यों के आधार पर यह संस्कृति विकसित होती गयी और दुनियां भर में आकर्षण का केंद्र बनी रही.

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भारतीय संस्कृति में बदलाव

बदलते वक्त के साथ-साथ सबकुछ बदलता जा रहा है. हम भी बदलते जा रहे हैं और हमारा देश भी बदलता जा रहा है. अगर बदलाव कहीं बाकी है तो वह है हमारी रूढ़िवादी सोच में. भारत, इंडिया बन गया और हम रूढ़िवादी संस्कृति की मानसिकताओं में उलझे हैं अभी तक. मेरा मतलब यह बिलकुल नहीं है कि भारतीय संस्कृति में कोई कमी है. भारतीय संस्कृति की कई विशेषताएं हैं. इसकी सबसे बड़ी विशेषता तो यह है कि कई युगों के बाद भी भारतीय संस्कृति आज भी अपने परम्परागत अस्तित्व के साथ जीवित है. हमारी भारतीय संस्कृति, शायद दुनिया की सभी संस्कृतियों से अच्छी है. ऐसा मैं भी मानता हूँ और दुनिया के हर बुद्धिजीवी भी इस बात को मानते हैं. अब रही बात कि कमी कहाँ है ? भारत और इंडिया की संस्कृति में क्या फर्क है ? तो मेरा जवाब है, वही फर्क है जो भारत और इंडिया में है.

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रूढ़िवादी सोच

हम भारतीय खुद को प्रमोट करना चाहते हैं. हम हिंदी को छोड़कर अंग्रेज़ी की तरफ भाग रहे हैं, लेकिन अपनी सोंच को नहीं बदलना चाहते हैं. हमारी भारतीय संस्कृति की सभी बातें अच्छी हैं. लेकिन क्या इन्हें भी प्रमोट करने की ज़रूरत नहीं है ? बाबूजी को डैड बना दिया और माँ जी को मॉम, तो संस्कृति को मॉम बनाने में क्या परेशानी हैं ? हमारे विचार समय के साथ बदलते रहते हैं. हमारी ज़रूरतें बदलते वक्त के साथ बदलती रहती हैं… फिर रूढ़िवादी सोच में मॉडिफिकेशन क्यों नहीं कर रहे हैं हम ? क्यों आज भी उन्हीं सोंच को मन में पाल रहे हैं, जो बहुत पहले ऑउटडेटेड हो चुकी हैं.

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अब देखिए, लोग आज भी बेटे और बेटियों में कितनी विभिन्नताएँ रखते हैं. बेटा कुछ भी करके आए तो चलेगा क्योंकि मर्द जात है पर बेटियों को अपनी संस्कृति नहीं भूलनी चाहिए, क्योंकि बेटियाँ  घर की इज़्ज़त होती हैं. बेटियों को वो नहीं करना चाहिए क्योंकि वह एक लड़की है… ऐसा नहीं करना चाहिए क्योंकि वह एक लड़की है… वैसा नहीं करना चाहिए क्योंकि वह एक लड़की है…

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बेटियों का अस्तित्व

एक पूरी लिस्ट बना रखी है मैंने, उन पर एक नज़र डालिये और सोचिये…

तुम इस तरह के कपड़े नहीं पहन सकती, क्योंकि तुम एक लड़की हो.

धीरे से और मीठे वचन बोलना सीखो, क्योंकि तुम एक लड़की हो.

तुम यह सही कह रही हो न ? मत भूलो कि तुम एक लड़की हो.

घर जल्दी लौट आया करो, मत भूलो कि तुम एक लड़की हो.

लड़कों से बातें मत किया करो, क्योंकि तुम एक लड़की हो.

सलीके से कपड़े पहना करो, क्योंकि तुम एक लड़की हो.

ढंग से बैठना सीखो, क्योंकि तुम एक लड़की हो.

ढंग से खाना खाओ, तुम एक लड़की हो.

लोगों का सम्मान करना सीखो,

ऐसा मत करो तुम एक लड़की हो.

खाना बनाना सीख लो, तुम एक लड़की हो.

ऐसे मत हँसा करो, क्योंकि तुम एक लड़की हो.

झाड़ू-पोछा करना सीख लो, क्योंकि तुम एक लड़की हो.

अपना वज़न कुछ कम कर लो, क्योंकि तुम एक लड़की हो.

खुद को अच्छी तरह ढक कर रखा करो, क्योंकि तुम एक लड़की हो.

इस वक्त घर से बाहर मत निकलो, मत भूलो कि तुम एक लड़की हो.

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क्या यह भी भारतीय संस्कृति का हिस्सा है ?

लड़कियों को पता है कि वे कौन हैं. क्या बार-बार याद दिलाना ज़रूरी है कि वह एक लड़की है? क्या यह भी हमारी भारतीय संस्कृति का हिस्सा है ? कुछ लोगों को ऐसा क्यों लगता है कि लड़कियों को एहसास कराते रहना चाहिए कि वह एक लड़की है. क्या लड़कियों को अपनी सभ्यता, संस्कृती और मान्यताओं की अहमियत नहीं है ? अभिभावको को चाहिए कि वे लड़कियों को भारतीय संस्कृति व सभ्यता सिखायें, ज़रूरी है. उन्हें अपनी प्राचीन भारतीय संस्कृति को अपनाए रहना भी सिखाएँ, लेकिन क्या इस तरह से ?

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भारतीय संस्कृति की बातें वक्त के साथ बदल रही हैं. हमें भी भारतीय संस्कृति के दायरे में रहते हुए ज़रूरत है अपनी सोच को बदलने की. लड़की है तो ऐसा मत करो, वैसा मत करो… लड़कियों को कब तक हम एक कमज़ोरी के दायरे में रखेंगे? अगर हमारी भारतीय संस्कृति हमें लड़का और लड़की में भेद-भाव सिखाती है तो ज़रूरत है ऐसी संस्कृति को बदल डालने की. अगर हम भारतीय संस्कृति नहीं बदल सकते तो हमें अपनी सोच बदल लेनी चाहिए. अगर सचमुच अपनी लाड़ली के भविष्य की फिक्र है, तो हमें चाहिए उनपर भरोसा करें. उन्हें आत्म निर्भर बनाएँ, और ये तभी संभव है जब हम अपने विचारों में बदलाव लाएंगे.

भारतीय संस्कृति ( Bhartiya Sanskriti ) की विशेषताओं पर अधिक जानकारी की लिए पढ़ें विकिपीडिया.

Abhi aap padh rahe the Bhartiya Sanskriti ( भारतीय संस्कृति ) ki visheshta. To know more advantages and disadvantages of Indian culture ( भारतीय संस्कृति ) visit Quora.

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