शादी इसे कहते है, विवाह पर कुछ शुभ बातें

शादी तो सभी करते हैं, लेकिन जब पूछा जाए कि शादी क्या है, तो इसका उचित जवाब शायद हर किसी के पास ना हो. होगा भी कैसे, हमें सब कुछ पढ़ाया जाता है, सब कुछ सिखाया जाता है, लेकिन जीवन के आधार को हम इग्नोर करते रहते हैं. अक्सर लोगों की यह धारणा होती है कि शादी का मतलब शारीरिक सम्बन्ध बनाना और बच्चे पैदा करना होता है. कुछ और निम्न श्रेणी के लोगों से पूछिए कि शादी क्या होती है ? क्यों करते हैं शादी ? तो हो सकता है आपको जवाब मिले ‘घर संभालने के लिए, बूढ़े माँ-बाप की देख-रेख के लिए’. कुछ का जवाब यह भी हो सकता है कि शादी शारीरिक जरूरतों को पूरा करने के लिए की जाती है.

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दरसल शादी, जो हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण सत्य है, इसके अर्थ या मतलब को लेकर अधिकतर लोगों में गलतफहमी है. शादी को कुछ लोग सामाजिक बंधन मानते हैं, कुछ लोग इसे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण रिश्ता, तो कुछ का मानना है कि शादी दो इंसानों के बीच एक समझौता है, जिसे रीति-रिवाज़ और धर्म-संस्कार के माध्यम से पूर्ण किया जाता हैं.

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क्या शादी एक मज़ाक है ?

प्रायः लोगों में शादी को लेकर मज़ाकिया धारणाएँ भी होती है. जैसे – शादी का लड्डू जो खाये वो पछताए और जो ना खाये वो भी पछताए, तो कुछ लोग इस कहावत पर अपनी प्रतिक्रिया भी देते हैं ‘भैया जब खाकर भी पछताना है और ना खाकर भी पछताना है, तो बेहतर है खा ही लो’. मतलब, क्या है यह? ‘खा ही लो’ मतलब… कैसी सोच है यह? क्या विवाह सचमुच एक लड्डू है, जिसे खाया और पचाया ? कुछ महानुभाव तो विवाह होने को बेड़ियाँ भी कहते हैं, कुछ लोग ‘शादी है बर्बादी’ वाली नीति अपनाते हैं. बहुत बुरा तो तब लगता है जब पत्नियों पर चुटकुले पढता हूँ. कब तक ऐसी सोच रखेंगे हम ? पत्नियों पर जितने भी चुटकुले आप पढ़ेंगे, लगभग सभी चुटकुलों में पत्नियों को मूर्ख के रूप में दर्शाया गया हैं.

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क्या महिलायें मूर्ख होती हैं ?

हमारी संस्कृति, हमारे धार्मिक वेदों में पत्नी को अर्द्धांगिनी कहा गया है. पत्नी को गृहलक्ष्मी की संज्ञा दी गयी है या पत्नी को जीवन-साथी भी मानते हैं. अगर सचमुच ये सभी बातें सही हैं तो उनका मज़ाक क्यों उड़ाया जाता हैं ? उन्हें बेवकूफ क्यों समझा जाता है ? क्या कोई अपनी अर्द्धांगिनी का मजाक उड़ा कर खुद का मज़ाक नहीं बना रहा होता है?  गृहलक्ष्मी को अपने पैरों की बेड़ियाँ समझने वाले लोगों से क्या खुश रहेंगी लक्ष्मी? जीवन-साथी को जी का जंजाल समझने वाले लोगों को क्या कभी किसी का साथ मिल पायेगा ?

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शादी से पहले शादी को समझें

स्कूल जाने से पहले हम जानते हैं कि स्कूल क्यों जाते हैं. बाज़ार जाते हैं तो बाजार जाने की वजह भी हमें मालूम होती है. सुबह या शाम को गार्डन जाते हैं तो इसकी वजह भी हम जान रहे होते हैं, लेकिन शादी करने से पहले क्या यह जानना ज़रूरी नहीं है कि शादी होती क्या है ? क्यों करनी चाहिए शादी हमें?  हम सभी जानते हैं कि विवाह हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण फैसला होता है. हमारे इसी एक फैसले पर जीवन के सभी सुख-दुःख निर्भर करते हैं. विवाह के बाद हम एक से दो हो चुके होते हैं इसलिए हमारी जिंदगी पूरी तरह से बदल चुकी होती है.

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विवाह से पहले इंसान सिर्फ ‘मैं’ होता है, इसलिए उसकी जिंदगी सिर्फ उसकी होती हैं, उसके सभी फैसले या उसका हर सुख-दुःख सिर्फ उसका होता है, लेकिन विवाह के बाद वह ‘मैं’  ‘हम’ में बदल चुका होता है, इसलिए उसके सभी फैसले या सुख-दुःख अब ‘उनके’ बन चुके होते है. यहाँ तक कि मैरिज से पहले उसका शरीर भी सिर्फ उसका था, लेकिन मैरिज के बाद आधे शरीर पर पत्नी का हक़ और पत्नी के आधे शरीर पर उसका हक़ हो जाता है इसलिए तो पत्नी को हमारे शास्त्रों में अर्द्धागिनी भी कहा गया है.

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शादी क्यों करनी चाहिए ?

जब हम शादी का मतलब समझ चुके होते हैं तो ‘क्यों करनी चाहिए शादी? ‘ का जवाब भी हमें मालूम होता है. हम समझ चुके होते हैं कि विवाह कोई बंधन नहीं बल्कि जिंदगी भर का साथ निभाने के लिए, हर सुख-दुख में साथ निभाने के लिए, समस्याओं के हर बंधन को तोड़ने के लिए, एक साथी के लिए करते हैं. जो लोग शादी को समझ चुके होते हैं उन्हें पता होता है कि जिंदगी के सफर में एक वफादार हमसफ़र मिल जाए तो सफर  आसान हो जाता है.

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हमारी जिंदगी में कई घटनाएं ऐसी होती हैं जिनका ज़िक्र किसी और के साथ करना उचित नहीं होता है. कुछ बातें ऐसीं भी होती हैं जिनकी चर्चा, भाई-बहन या माता-पिता से भी नहीं कर सकते. ऐसे हालात में हमें जरूरत होती है एक ऐसे मित्र की, एक ऐसे साथी की जिसपर हम पूरी तरह से भरोसा कर सकें. एक ऐसा साथी जो पूरी वफादारी से हमारी समस्यायों का दर्द महसूस कर सकें और हमारी समस्यायों को अपनी समस्याएं समझते हुए हमारी मदद करे. एक ऐसे साथी की ज़रूरत होती है जिसकी पूरी जिंदगी हमारी जिंदगी से जुडी हो. ऐसा साथी जिससे हमें कभी कोई असुरक्षा ना हो और मेरी समझ से आज-कल के मनी माइंडेड युग में ऐसा साथी सिर्फ विवाह के बाद ही एक जीवन-साथी के रूप में मिल सकता है.

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शादी अकेलापन को दूर करती है

हमारी जिंदगी में कभी न कभी ऐसा भी वक्त आता है जब हमें एकांत या अकेलेपन की जरूरत होती है. ऐसी अवस्था तब आती है जब हम दुनिया के सभी लोगों से नाउम्मीद हो चुके होते हैं. ऐसा तब होता है जब हमें किसी पर भरोसा नहीं रह जाता. ऐसे वक्त में अगर एक भी साथी ऐसा हो जो हमारी भावनाओं को समझे, हमारी समस्यायों को अपनी समस्याएं समझे तो विश्वास कीजिये उस वक्त एकांत में जाने के बजाय हम उस साथी के पास पहुंचेंगे. हमारी जिंदगी में कोई ऐसा साथी हो जो हमारी सभी उलझनों को हमारे साथ मिलकर सुलझाए. ज़िंदगी की हर मुश्किल घड़ी में, सभी खुशियों के पलों में, कोई हमसाया हो तो फिर बात ही क्या !

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अकेलेपन के पलों में हमलोग खालीपन और एकान्त का अनुभव करते हैं. जब भी हम अपनी परिस्थितियों के कारण या अपनी चाहतों के कारण अकेलापन महसूस करते हैं, उस वक्त ऐसा लगता है कि काश कोई ऐसा हो जो ऐसी मुश्किल घड़ी में आपका साथ दे. ऐसा साथी सिर्फ और सिर्फ शादी के बाद ही मिल सकता है. शादी के बाद साथ निभाने के लिए एक जीवन-साथी मिलता है, जिसके साथ हम निश्चिंत होकर अपनी मुश्‍किलें, सुख-दुःख बांट सकते हैं. ऐसा साथी मिलता है जो जिंदगी के सफर में हमसफ़र होता है, हमसाया होता है, क्योंकि उसकी जिंदगी, उसके दुःख-सुख, उसके अच्छे-बुरे वक्त सबकुछ हम से जुड़े होते हैं.

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शादी के पहले साथी का चयन कैसे करें ?

जिसके साथ हमारी शादी की बात चल रही है, उसे हम कितना जानते हैं या कितना समझते हैं ये बातें बहुत मायने रखती हैं. क्योंकि जिससे शादी होने वाली है वह हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण है यह आप जान चुके हैं. इसीलिए बहुत जरूरी है कि शादी से पहले अपने होने वाले जीवन-साथी के विषय में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कर लें.

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