शादी कब होगी . Shadi Kab Hogi . Shaadi Ke Baad

शादी कब करनी चाहिए या शादी कब होगी ज़रूरी बातें हैं. शादी एक सामाजिक बंधन है. हमें फिक्र होनी चाहिए कि शादी कब होगी. विवाह का एक धार्मिक महत्व है, इसलिए हमें सोचना चाहिए कि शादी कब होगी. विवाह दो लोगों के बीच जन्म-जन्मान्तरों का सम्बन्ध होता है इसलिए सोचना ज़रूरी है कि शादी कब होगी.

हमारे जीवन में शादी एक महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान है. शादी दुनिया के हर समाज की एक आवश्यक परंपरा है. इसलिए शादी कब होगी जैसी फिक्र होना ज़रूरी है.

शादी कब होगी की चिंता

शादी कब होगी, यह तीन शब्दों का सवाल भले ही छोटा है लेकिन इसमें कई जिज्ञासाएं छुपी हैं. युवक हो या युवती, उनके मन में यह सवाल कभी न कभी एक बार ज़रूर आता है कि शादी कब होगी और कैसे होगी. लगभग सभी एस्ट्रोलॉजी वेबसाइट के सवाल-जवाब कॉलम में सबसे अधिक पूछा जाने वाला सवाल यही होता है कि मेरी शादी कब होगी. सिर्फ उनकी ही नहीं, उनके माता-पिता की भी चिंता की यह एक बड़ी वजह है कि उनके बच्चों की शादी कब होगी और कैसा होगा उनका जीवन साथी. खासकर बेटियों की शादी को लेकर अभिभावकों के मन में यह बेचैनी अधिक रहती है.

शादी कब होगी की चिंता

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ज्योतिष से पूछे गए सवालों में अक्सर बेटियां अपने पेरेंट्स के बेचैनी और तनाव का भी ज़िक्र करती हैं. जिनकी वजह सिर्फ यही सवाल होते हैं कि कैसे और कब होगी उनकी लाड़ली की शादी… इस सवाल का जवाब ढूंढने के लिए कुंडली देखी जाती है. बेटी की शादी कब होगी यह जानने के लिए हस्त रेखाओं को टटोला जाता है. शादी कब होगी या कैसा वर मिलेगा. इन सवालों के साथ पंडितों के चक्कर भी काटे जाते हैं.

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क्या शादी एक स्टेटस सिंबल है ?

शादी कब होगी जैसी चिंता को दूर करने के लिए शादी जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लेने में अधिकतर लोग सिर्फ यही सोचते हैं कि अच्छी वधु या अच्छा वर कैसे मिले. घरवाले कैसे होने चाहिए. दहेज़ क्या-क्या लेना है या क्या क्या देना है. आज-कल दिखावे की दौड़ में हर कोई चाहता है कि उसकी शादी धूम-धाम से हो. ऐसी शादी हो जिसे लोग याद रखें. अपने सोशल स्टेटस के लिए लोग पेट काट कर उम्र भर पैसे जोड़ते रहते हैं. कुछ लोग तो इस शुभ महुरत के लिए ज़मीन जायदाद भी बेच डालते हैं.

 

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कुछ लोग तो विहोत्सव को एक यादगार उत्सव बनाने के लिए क़र्ज़ लेने से भी नहीं हिचकिचाते क्योंकि शादी का मामला है, बार-बार थोड़े ही होगा. ज़िंदगी में एक बार शादी होती है, इसी मानसिकता की वजह से लोग ताम-झाम में फ़िज़ूल खर्च करने से नहीं हिचकते. लेकिन जब शादी हो जाती है. उसके बाद दूल्हा-दुल्हन को पता लगता है कि अच्छे-खासे क़र्ज़ हो रखें हैं. अपनी नव विवाहित ज़िंदगी की मौज-मस्ती को भूलकर क़र्ज़ कैसे चुकाएँ, इस तनाव में रहने लगते हैं.

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क़र्ज़ की मुसीबत अभी ख़त्म भी नहीं हुई कि एक और खर्च सामने तैयार होने लगता है. घरवालों को पता लगता है कि दुल्हन माँ बनने वाली है. अब उसकी मेडिकल ट्रीटमेंट के रेगुलर खर्चे. कुछ दिनों बाद घर में नए मेहमान का आगमन होता है. अब उसके डायपर, दूध और आए दिन नए-नए मेडिकल खर्चे. बच्चा धीरे-धीरे बड़ा होने लगता है, फिर उसके स्कूल के खर्चे. कुछ दिनों बाद फिर दूसरा बच्चा. फिर से वही सब खर्चे. कुल मिलाकर ज़िम्मेदारियों के बोझ तले ज़िंदगी की बैंड बज जाती है.

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फाइनैंशियल सपोर्ट

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कुछ पेरेंट्स फाइनैंशियली मजबूत होते हैं. कुछ लोगों के पास अच्छी खासी ज़मीन-जायदाद होती है, तो कुछ लोगों की अच्छी नौकरी होती है. इसलिए उनकी परेशानी यह नहीं होती कि शादी कैसे होगी, बल्कि वे इस बात को लेकर उत्सुक रहते है कि उनके जवान होते बच्चों की शादी कब होगी.

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शादी से पहले करियर

शादी कब होगी यह सोचने से पहले, शादी के बाद क्या होगा, सोचना ज़रूरी है. करियर बनाने के लिए एक निश्चित उम्र होती हैं. अगर सरकारी नौकरी करनी हो, तो हरेक विभाग की अपनी-अपनी मिनिमम या मैक्सिमम उम्र सीमा होती है. बिज़नेस करना है तो इसे भी चलाने या जमाने में वक्त लगता हैं. शादी कब होगी सोचने से पहले यह सोचना ज़रूरी है कि ज़िंदगी में कुछ हासिल करना है या नहीं. अगर हासिल करना है. ज़िंदगी में कुछ बनना है. अपने भविष्य को उज्जवल बनाना है, तो शादी-विवाह से दूर ही रहना बेहतर है.

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शादी कब होगी सोचना बंद करें. शादी कभी भी की जा सकती है. लेकिन ये अवधि, ये समय, ये जूनून, ज़िंदगी में कुछ कर गुज़रने का जज़्बा और समय जो गुज़र रहा है, वो फिर नहीं आएगा.  ध्यान रखें घर बसाने की, शादी-विवाह करने की उम्र सीमा नहीं होती, लेकिन करियर बनाने की उम्र सीमा होती है. शादी कब होगी जैसी चिंता छोड़कर, इस बात की फिक्र की जाए कि कैसे एक अच्छा करियर बनाएं. क्योंकि एक अच्छा करियर निश्चित रूप से अच्छी ज़िंदगी देगा. ज़िंदगी बेहतर होगी तो शादी कब होगी या कैसे होगी जैसी समस्या अर्थहीन हो जायेगी.

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शादी के लिए क्या है सही उम्र

शादी कब होगी या किस उम्र में करनी चाहिए. इस विषय पर हर किसी के अपने-अपने विचार हैं. किसी का मानना है 26-29 तक शादी कर लेनी चाहिए क्योंकि अधिक उम्र के नव विवाहित जोड़े को अपनी नयी ज़िंदगी का लुत्फ़ उठाने का अधिक मौका नहीं मिलता. उन्हें अपनी अधिक उम्र हो जाने की वजह से, उनपर बच्चों को लेकर प्लानिंग करने का दबाव रहता है. उन्हें अपनी शादीशुदा ज़िंदगी को एंजॉय करने का भरपूर समय नहीं मिल पाता.

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अधिक उम्र होने की वजह से पति-पत्नी दोनों ही परिपक्व हो चुके होते हैं. इस वजह से दोनों के विचारों में मतभेद रहते हैं. अधिकतर लोगों में ऐसे ही कई वजह या बहाने होते हैं, तर्क होते हैं. तर्क-वितर्क करना चाहिए. लेकिन आपके तर्क का आपके लाडले या लाड़ली की जिंदगी पर क्या असर होगा, ये ज़रूर सोच लें.

कब करें शादी

कानूनी रूप से भारत में लड़कियों की उम्र कम से कम 18 साल और लड़कों की उम्र 21 साल है. तो क्या हमें इसी उम्र में शादी कर लेनी चाहिए ? कुछ लोगों का तर्क हो सकता है कि जब क़ानून 18 के बाद या 21 के बाद शादी करने की अनुमति दे रहा है, तो इस उम्र में शादी करने में क्या बुराई है ? बिलकुल सही सोंच रहे हैं. सोचने की बात भी है. क्योंकि क़ानून बनाने वाले लोगों ने बहुत विचारने के बाद ही ऐसा कानून बनाया है ! लोग क़ानून का पालन करते हैं. शादी के मुद्दे पर भी क़ानून का पालन करें. ये अच्छी बात है. लेकिन ज़िंदगी और भविष्य का क्या?

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इसलिए शादी कब होगी जैसी बातों पर चिंता करने से पहले एक अच्छे भविष्य के बारे में सोचें. शादी कब होगी जैसी बातों पर फिक्र करने से पहले हमें इस बात की फिक्र होनी चाहिए कि बेहतर जिंदगी कैसे मिलेगी. 18 या 21 पढ़ने की ही उम्र होती है. क़ानून में शादी के लिए उम्र 18 और 21 निश्चित की गयी है तो यह मिनिमम यानी न्यूनतम उम्र तय की गयी है. शादी कब होगी जैसी सोच से बाहर निकलकर यह सोचना ज़रूरी है कि ज़िंदगी हमारी है. इसे बेहतर बनाए या बदतर, हमारे ही हाथ में है.

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शादी कब होगी की फिक्र से पहले सावधानी

शादी कब होगी जैसी बातों की फिक्र करने से पहले यह सोचना जरूरी है कि शादी के बाद क्या होगा. शादी कब होगी या कैसे होगी इसके पहले सोचना ज़रूरी है कि यह महज़ एक रस्म नहीं बल्कि एक महत्पूर्ण निर्णय है. शादी कब होगी या किससे होगी यह महत्वपूर्ण नहीं. बल्कि महत्वपूर्ण यह है कि इस निर्णय को लेने में कितनी सावधानी बरती जा रही है. शादी कब होगी की फिक्र कभी भी की जा सकती है. शादी कब होगी की चिंता से बेहतर सोच है शादी होने के बाद ज़िन्दगी कैसी होगी.

 

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