शादी से पहले शारीरिक संबंध Shaadi se pehle sharirik Sambandh

शादी से पहले शारीरिक संबंध Shaadi se pehle sharirik Sambandh

भारतीय संस्कृति के अनुसार शादी से पहले शारीरिक संबंध बनाना पाप माना गया है. लेकिन बदलते वक्त और माहौल के साथ-साथ, शादी से पहले सेक्स करना सामान्य होता जा रहा है. एक तरफ जहाँ live in relation को कानूनी दर्जा दिए गए हैं. वही दूसरी तरफ शादी से पहले के रिश्ते को लेकर युवाओं में उलझन है.

मेरा एक सहकर्मी विवेक (बदला हुआ नाम) लगातार तीन दिनों से डॉक्टर के चक्कर काट रहा था. चौथे दिन कुछ रूपये एडवांस लेने के लिए मेरे पास आया. पूछने पर बताने लगा कि उसकी पत्नी की कोई गाइनो से सम्बंधित इलाज कराने हैं. मैंने पैसे दे दिए. कुछ दिनों तक जब वह अपने काम पर नहीं लौटा, तो मैंने उसकी खोज खबड़ ली. फ़ोन भी ऑफ. उसके घर पर आदमी भेजा तो जनाब घर पर ही आराम फरमाते मिलें. मैंने जब फ़ोन पर बात करके उसे ऑफिस आने को कहा. तो उसने फ़ोन पर ही अपने नौकड़ी को तलाक कह दिया. अपने गाँव लौटने की बात करने लगा.

मुझे पता था उसकी फाइनेंसियल अवस्था वैसी नहीं है कि वह अपने गाँव में रह कर दो वक्त की रोटी भी खा सके. मैंने तय कर लिया कि इसे कैसे करके भी गाँव जाने से रोकना होगा. उसे पुचकार कर ऑफिस बुलाया.

कुछ देर बाद वह आया साथ में उसकी पत्नी पूजा भी थी. दोनों के चेहरे पर उदासी. जब विवेक से उसके अचानक नैकडी छोड़ने और गाँव जाने की बात की तो उसने अपनी पत्नी की बीमारी का बहाना किया. कहने लगा शहर की हवा-पानी पूजा को बीमार कर रखा है.

दोस्तों के वजह से शक करना

बातों के दौरान पूजा मुझसे कुछ इशारा कर रही थी. कुछ कहना चाह रही थी. मुझे विवेक की बातों से कुछ संदेह हुआ. कॉल करके मैंने अपनी पत्नी जी मीनल को तुरत ऑफिस बुला लिया. मीनल को एकांत में ले जाकर उससे अपने संदेह की बात कहके उसे जासूसी में लगा दिया. अब पूजा और मीनल ऑफिस के दूसरे कमरे में थे. कुछ घंटे बाद जब दोनों कमरे से निकले तो मीनल मुझसे, उन्हें अब जाने देने को कहने लगी. दोनों चले गए और हम भी अपने घर आ गए.

मीनल मुझसे उनके विषय में जो बातें बताई, मैं दंग रह गया. कैसे एक हाई क्वालिफाइड व्यक्ति ऐसा सोच सकता है! वह भी ऐसे आधुनिकता वाले दौड़ में!

विवेक एक दुबला पतला और साधारण सा दिखने वाला लड़का था. उसकी पहली पत्नी आभा बहुत खूबसूरत थी. विवेक के मुकाबले वह उससे लम्बी और काफी हेल्दी थी. एक खुशमिजाज और मिलनसार व्यक्तित्व होने के वजह से उसके कई लड़के-लड़कियां फ्रेंड्स थे. शादी के कुछ दिनों बाद ही दोनों में रोज-रोज खिटपिट होने लगे. शादी के साल भर के अंदर ही दोनों तलाक के लिए कोर्ट पहुँच गए. 6-7 महीने के बाद तलाक हो गयी. उनकी शादी टूटना और तलाक होना किसी को अच्छा नहीं लगा. न उनके रिश्तेदारों को, न घरवालों को और ना हीं हमें. क्योंकि आभा थी ही वैसी. सब का दिल जीत लेने वाली एक ज़िंदादिल इंसान. विवेक की जिंदगी से आभा के जाने का दुःख मुझे भी हुआ था. पता नहीं, विवेक की क्यों नहीं बनी. अब उसके दूसरे शादी में भी तनाव आने लगे थे.

मानसिक दिवालियापन का परिचय

आज उसकी दूसरी पत्नी पूजा, विवेक के घटिया सोच के बारे में मीनल से बताने लगी. शादी की पहली रात जिसे सुहाग रात कहते हैं. वह रात दो जिस्मों के सिर्फ मिलन के ही नहीं, बल्कि दो जिंदगी… दो आत्माओं के मिलन की रात होती है. उसी रात इस विवेक ने अपनी मानसिक दिवालियापन का परिचय अपनी नयी-नवेली दुल्हन को दे चूका था. सुहाग रात की शुरुआत कैसे होती है? या क्या होती है? शायद फिल्मो से ही सीखकर, मगर एक जाहिल इंसान को भी पता होता है. पर इस एडुकेटेड मुर्ख ने एडुकेटेड लोगों पर ही एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया था.

सुहागरात में अपनी दुल्हन के लिए, विवेक के मुंह से जो पहला शब्द निकला. वो था – “खोलो”

उसकी ऐसी बेहूदपंति वाली हरकत से पूजा को अजीब लगा. विवेक बोला “देखो बुरा मत मानो. तुम मेरी पत्नी हो. हम दोनों की अब एक जिंदगी है. हमदोनो का शरीर भी अब एक-दूसरे के लिए है. इसलिए तुम्हारे हर अंग को मैं गौर से देखना चाहता हूँ. तुम नंगी हो जाओ.”

पूजा हिचकती हुई अपने कपडे उतार दी. फिर उससे अपनी टाँगे फैला कर लेटने को कहा गया. जब वह लेट गयी. विवेक कमरे में जलती हुई लाइट में भी मोबाइल का टोर्च ऑन करके उसके वजाइना को नजदीक से देखने लगा. कुछ देर अपनी उँगलियों से उसमे कुछ हरकतें करता हुआ देखता रहा. फिर एक मंजा हुआ अनुभवी डॉक्टर की तरह पूजा से पूछने लगा “सच बताओ शादी से पहले तुम्हारा कितने लोगों से ये सब चल रहा था?”

शादी से पहले की सम्बन्ध को स्वीकार करना

भोली- भाली पूजा डर गयी. क्योंकि उसके शादी से पहले शारीरिक संबंध कुछ लोगों के साथ रह चुके थे. विवेक के डराने धमकाने पर, पूजा ने अपने शादी से पहले के सम्बन्ध के विषय में विवेक से सबकुछ बता दिया. ये विवेक के लिए अच्छी खबर थी. क्योंकि पूजा की कोई भी बातें अब उसके लिए रहस्य नहीं रह गया था. एक संतुस्टी उसके चेहरे पर थी.

विवेक सोचने लगा कि पहली पत्नी आभा तो खुद को चरित्रवान और पाप-पुण्य की बात करने वालों में से थी. पर हरकतें उसकी किसी बहकी हुई चरित्रहीन औरत से कम नहीं थे.

विवेक को तसल्ली हुई कि चलो दूसरी वाली तो जैसी है, वैसी ही खुद को ईमानदारी से स्वीकार कर रही है. पूजा का भी मन हल्का हो गया था. जिंदगी अच्छी जा रही थी. पर विवेक सेक्सुअली काफी वायलेंट होने लगा. जब भी उसे मौका मिलता, वह पूजा के साथ सम्बन्ध बनाने लगता. हरकतें वहसी दरिंदे की तरह. टेढ़े-मेढ़े तरीके से सम्बन्ध बनाना. सम्बन्ध बनाने के वक्त, ऐसी-ऐसी तरकीबें आजमाना जिससे पूजा को दर्द हो और वह दर्द के पीड़ा से तड़पे और छटपटाये. पूजा जब उससे ऐसी हरकतें नहीं करने की मिन्नतें करती, तो उसका जवाब होता था “मैं तुम्हे एहसास कराना चाहता हूँ कि तुमने शादी से पहले जितने लोगों के साथ सम्बन्ध बनाये हैं, उन सबसे अधिक मैं संतुस्टी दे सकता हूँ तुझे”

पूजा कहती “अरे वो सब मेरा बचपना था. मेरी नादानियों और बेवकूफियों के वजह से वह सब शादी से पहले होता रहा. मैं अब शादी-शुदा हूँ. शादी से पहले मेरी जिंदगी सिर्फ मेरी थी. ये सब तब चालू हुआ जब मुझे पता भी नहीं था कि ये होता क्या है! अब मैं नादान नहीं हूँ. न ही मेरी ज़िन्दगी अब पहले वाली है. अब मैं एक पत्नी हूँ. एक लड़की नहीं.”

हीन भावना से ग्रसित पति

दरअसल, विवेक अपने दुबले-पतले शरीर के वजह से हीन भावना से ग्रसित था. उसे लगता था कि उसकी पत्नी शादी से पहले भी कई लोगों के सम्बन्ध में रही है. वह अगर उसे पूरी तरह से संतुस्ट नहीं कर सकेगा तो फिर से वह अपने पहले वाली जिंदगी शुरू कर लेगी. पूजा के प्रति खुद को असुरक्षित महसूस करने लगा. रात में भी जाग-जाग कर चेक करने लगा कि पूजा कही और तो नहीं जा रही. कभी-कभी दिन में भी किसी बहाने से, किसी भी वक्त अपने घर चला जाता था. ये देखने कि पूजा घर में ही है या कहीं और.

पूजा से विवेक की शादी के बाद, आभा, विवेक के घर आयी थी. अपने कुछ बचे हुए सामान लेने के लिए. विवेक घर पर नहीं था. तलाक की वजह, जब पूजा उससे जानना चाही. वह बता रही थी कि अपने पेरेंट्स की एकलौती संतान होने की वजह से कहीं भी उसे अकेले जाने को नहीं मिला. मेरे सभी फ्रेंड को जब मिलना होता था तो उन्हें मेरे घर पर ही आना होता था. चाहे दिन भर में कितने ही आये… लड़का हो या लड़की मेरे पेरेंट्स को इसमें कोई आपत्ति नहीं थी.

विवेक उसके खुशमिजाजी को फ़्लर्ट करना समझता था. जब भी वह मैके जाती थी. शादी से पहले के तरह ही उसके सभी दोस्त उससे मिलने, उससे बातें करने उसके घर पर आते थे. इन बातों को विवेक उसका आवारापंती समझने लगा.

बीमार मानसिकता

विवेक को शक होने लगा कि शादी से पहले जरूर आभा के किसी न किसी के साथ सम्बन्ध रहे होंगे. उसे लगता था कि वह आभा से कमजोर है. इसलिए आभा को शादी से पहले वाली सेक्सुअल संतुष्टि नहीं दे पा रहा है. जब शादी के बाद आभा लड़कों से घुल-मिल कर रहती है. शादी से पहले न जाने क्या करती होगी! इन्ही लड़कों में से किसी के साथ इसके शादी से पहले सम्बन्ध रहे होंगे. शादी से पहले ऐसा करती होगी. शादी से पहले वैसा करती होगी. इसी तरह के फिजूल की बातें विवेक के मन में आने लगे. धीरे-धीरे शक की दीवार बढ़ते गए और दूरियां तलाक में बदल गयी.

ऐसी मानसिकता को बीमार मानसिकता ही कहना होगा.

मानता हूँ, पूजा से गलतियां हुई हैं. शादी से पहले उसने जो भी किया, वो गलत था. पर शादी के बाद वही गलती जब तक दुहराई ना जाए. क्या उसपर संदेह करना ठीक है?

उसकी वफादारी का सबूत क्या ये कम है कि उसने अपनी गलतियों को स्वीकार किया. शादी से पहले की सभी बातें अपने पति को बता दिया. उसके मन में चोर होता तो अब भी उन गलतियों को अपने पति से छुपा सकती थी. रही बात वजाइना के फैले या ढीले होने की. तो यह एक शारीरिक बनावट है. शरीर के बाकी अंगों के तरह हर किसी का अलग-अलग बनावट है. पूजा चाहती तो उससे शादी से पहले की बातें छुपा भी सकती थी. वजाइना के ढीलेपन की वजह मास्टरबेशन भी बता सकती थी. शादी से पहले मास्टरबेशन महिलाओं में भी एक कॉमन सेक्सुअल एक्टिविटी है.

शादी से पहले की बात को लेकर पूरी ज़िन्दगी ख़राब करना ठीक है?

विवेक के ऐसे सनकीपन के वजह से पूजा के वजाइना में जख्म हो गए थे. जिसके इलाज के लिए ये लोग हॉस्पिटल्स के चक्कर काट रहे थे. विवेक इस जख्म का जिम्मेवार, पूजा के शादी से पहले वाले सम्बन्ध को ठहरा रहा था. पूजा लाख विस्वास दिलाती रही कि अब ऐसा कुछ भी नहीं है. पर विवेक की बीमार सोंच ये मानने को तैयार नहीं. उसका कहना था कि जिस महिला को कई लोगों के साथ सम्बन्ध बनाने की आदत हो गयी है. वह एक मर्द से कभी खुश नहीं रह सकती. पूजा मजबूर थी. अपने निर्दोष होने का कोई सबूत उसके पास नहीं था. वजाइना में जख्म के वजह थे, विवेक का सेक्सुअली दानवों जैसी निर्दयी हरकतें.

इस विषय पर विवेक से मेरी और मीनल की लम्बी बातें हुई. हमने उसे काफी समझाया कि शादी से पहले फिजिकल रिलेशन्स गलत है, पर आज-कल एक आम बात है. शादी से पहले पूजा जो कुछ भी करती थी, जरूरी नहीं कि वह अब भी ऐसा करेगी. शादी से पहले वह जैसी भी थी, जरूरी नहीं कि अब भी वैसी ही हो. पर विवेक नहीं माना. वे लोग अपने गाँव चले गए. गाँव पर अपनी गरीबी की जिंदगी से तंग आकर, कुछ वर्षों बाद उन्हें फिर दिल्ली वापस आना पड़ा. मीनल से पूजा मिलने आयी थी. बता रही थी, विवेक गाँव जाने के बाद बीमार रहने लगा. पूजा दिन-रात अपने पति की सेवा में लग गयी. पूजा को अपनी गरीबी में अपने बीमार पति के साथ जिंदगी से संघर्ष करता देख, विवेक को खुद के गलत होने का एहसास होने लगा था.

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