जिंदगी की सचमुच बड़ी अजीब दास्ताँ है. कब क्या हो जाये. कब क्या सुनने को मिल जाए. कब क्या देखने को मिल जाए. ये अनुमान लगाना मुश्किल है. मुशीबतें कैसी भी हो, अगर घर के बड़े-बुजुर्ग खुश हैं तो सभी समस्याएं हवा हो जाती हैं. हमारा सच्चा प्यार, हमारे बुजुर्गों के लिए हो तो सचमुच उनके दिल से निकली दुआ मुशीबतों में वरदान है. जब हमारे बुजुर्ग खुश रहते हैं तो घर में एक अजीब सी energy का एहसास होता है. एक ऐसी positive energy जो हमें जिंदगी के हर मुशीबतों से लड़ने का हौसला देती हैं. हमारे बुजुर्गों के प्रति अगर हमारा सच्चा प्यार हो, उनके प्रति सच्ची feelings हो, तो सबकुछ आसान लगने लगता है.

मान लीजिये जनवरी में किसी की शादी हुई,

और फरवरी में पता लगे की दूल्हे की माँ को कैंसर है.

फिर मार्च में दूल्हे की दादी का देहांत.

अप्रैल में दूल्हे की नौकड़ी का छूट जाना.

माँ की इलाज के पैसे, घर खर्च के पैसे और ऊपर से नौकड़ी का छूट जाना. कैसे हालात रहे होंगे ऐसे घर में!

दूल्हा-दुल्हन के नए रिश्ते का स्वागत अगर जिंदगी ऐसे करें तो,क्या गुजरेगी इन दोनों मासूम दिलों पर!

शादी के कुछ महीने जहाँ हनीमून पीरियड कहलाती है, वही अगर एक-के-बाद-एक मुशीबतों की पंक्ति लग जाए तो क्या कहेंगे आप इसे!

जूते घिसने के बाद अगर नयी job दूसरे शहर में मिल भी जाए तो ऐसी job करें तो कैसे करें. एक तरफ घर में बीमार माँ जिसे देखने वाला नयी दुल्हन के अलावा घर में और कोई नहीं. दूसरी तरफ घर में एक नयी दुल्हन. जो अपने नयी जिंदगी और नया परिवार में कदम रखते ही मुसीबतों से घिर गयी. क्या गुजरता होगा उसके दिल पर! शादी के पहले उसके भी हर लड़कियों की तरह अनगिनत अरमान रहे होंगे. पर मिला क्या? लेकिन वह उफ़ तक न की और अपने नए घर की नयी मुसीबतों का सामना डट कर करती रही. उसे कभी किसी से कोई शिकायत नहीं हुआ. अपने किस्मत से भी नहीं. क्योंकि वह जानती थी उसका उसके बुजुर्गों के प्रति सच्चा प्यार का असर होगा. सभी मुशीबतें एक दिन खुद ही खत्म हो जाएंगे.

Job का होना, रोजगार का होना घर चलाने के लिए पहली जरूरत है. इस जरूरत को पूरी करने के लिए दूल्हे का दूसरी शहर जाना जरूरी है.

इन मुसीबतों में से, कोई एक मुसीबत भी किसी नए married couple के life में आये तो उनके लिए एक बड़ा चैलेंज बन जाता है.

यहाँ तो मुसीबतों का जैसे तूफ़ान ही आ गया हो.

इतनी विपत्तियों के बावजूद, इस जोड़े की आपस के रिश्ते मजबूत बने रहें. ऐसे में सच कहूं तो ये जोड़ी नए जोड़िओं के लिए एक उदाहरण है. कैसे संभाल पा रहे होंगे वो ऐसे हालात को! इसके पीछे मैं एक आशीर्वाद को बहुत श्रेय देता हूं- आशीर्वाद हमारे बुजुर्गों का, आशीर्वाद हमारे अपनों का, आशीर्वाद हमारे parents का.

हमारे parents या हमारे घर के बुजुर्ग दम्पतियों से अगर हम सीखें, तो ऐसी मुसीबतों से लड़ना आसान होजाता है.

वे हमें याद दिलाते हैं कि क्या संभव है.

वे कठिन समय के पीरियड में अपने लम्बे जीवन के अनुभव से हमारा साथ देते हैं.

वे अच्छी सलाह देते हैं.

वे हमें मुसीबतों से निकालते हुए आगे बढ़ने का लक्ष्य देते हैं.

सचमुच, अगर हंमारी सच्ची श्रद्धा और हमारा सच्चा प्यार, हमारे घर के बुजुर्गों के लिए हो तो. विस्वास कीजिये जिंदगी में कई ऐसी मुसीबतें हैं जो हमें आसान लगने लगते हैं.

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