सलीम अनारकली की प्रेम कहानी का खुलासा

माँ-बेटा थे सलीम और अनारकली 

मुगल शहज़ादे सलीम और अनारकली की प्रेम कहानी तो आपने कई बार सुनी और फिल्मों में देखी होगी. आप यह भी जानते होंगे कि मुगल बादशाह अकबर और सलीम के बीच मनमुटाव की मुख्य वजह सलीम अनारकली की मोहब्बत थी. यह सच भी है कि उनमें मतभेद की बड़ी वजह सलीम अनारकली की मोहब्बत थी, लेकिन सलीम अनारकली के बीच एक रिश्ता और भी था जिसे बहुत कम ही लोग जानते होंगे.

सलीम अनारकली की कहानी पर इतिहासकारों की व्याख्या

इतिहास की व्याख्या तथ्यों पर आधारित होती है और कई इतिहासकारों ने अलग-अलग ढंग से सलीम अनारकली के रिश्ते की व्याख्या की हैं. सलीम अनारकली के संबंधों को इतिहासकारों ने खंगाला है. उनके द्वारा इस विषय पर कई तरह से रिसर्च किये गए हैं. कई माध्यम से इसे खंगाला गया, लेकिन हर कोई अपनी ही कहानी को मुकम्मल मानता है.

एक पाकिस्तानी अखबार के अनुसार एक अंगरेज़ टूरिस्ट और व्यापारी विलियम फिंच अगस्त 1608 में भारत आए थे. फिंच ने एक पत्रिका में प्रकाशित अपने संस्मरणों में सलीम अनारकली की कहानी का ज़िक्र किया था. फिंच के मुताबिक अनारकली, अकबर की कई पत्नियों में से एक थी, जिससे अकबर का एक बेटा भी था, जिसका नाम दानियाल शाह था.

सलीम अनारकली की कहानी पर पहला खुलासा

सलीम अनारकली की कहानी पर पहला खुलासा सबसे पहले एक ब्रिटिश संपादक सैमुअल परचास की एक पुस्तक ‘परचास हिज पिलग्रिम्स’ सन 1625 में हुआ था. इस पुस्तक में ब्रिटिश टूरिस्ट अपनी-अपनी विश्व-यात्राओं का वर्णन किया करते थे. इसी पुस्तक में पहली बार सलीम अनारकली का ज़िक्र मिला था, जिसे एक ब्रिटिश टूरिस्ट फिंच ने हिन्दुस्तान की यात्रा के बाद लिखा था.

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सलीम अनारकली के बीच नाजायज़ सम्बन्ध

हिन्दुस्तान भ्रमण के दौरान फिंच लाहौर भी गया, जहाँ वह सन 1611 में पहुँचा था. वहाँ उसने अकबर की एक पत्नी अनारकली का सुंदर स्मारक देखा था, जिसका ज़िक्र करते हुए फिंच ने इस पुस्तक में लिखा है कि सलीम अनारकली के बीच नाजायज़ सम्बन्ध थे जिसके विषय में अकबर को पता लगा तो उसने अपनी पत्नी अनारकली को इसी महल की दीवार में चिनवा दिया था. विलियम फिंच के देखे जाने तक यह मकबरा अभी बन ही रहा था, जो अकबर की मौत के छः साल बाद सन 1615 में बनकर तैयार हुआ था.

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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में इतिहास के प्रोफेसर हेरम्ब चतुर्वेदी की पु‌स्तक ‘दास्तान मुगल महिलाओं की’ के अनुसार सलीम अनारकली का रिश्ता माँ-बेटे का था. हेरम्ब चतुर्वेदी की पुस्तक के अनुसार इस बात का खुलासा कई ब्रिटिश टूरिस्ट ने किया है. उनमें एक टूरिस्ट फिंच के अनुसार सलीम की लगभग तीन सौ पत्नियां और रखैल थीं. वह दिन-रात अपने भोग-विलास और मदिरा में मस्त रहता था. एक दिन नशे में धुत होकर उसने अकबर की पत्नी व अपने सबसे छोटे भाई दानियाल की मां, अनारकली का बलात्कार कर डाला, इसमें दोष अनारकली का भी था.

सलीम अनारकली के बीच नाजायज़ सम्बन्ध

फिन्च के अनुसार, अकबर ने अपनी पत्नी अनारकली को पर्दे के पीछे से सलीम को देख मुस्कुराता हुआ देख लिया था, और उसे यकीन हो गया कि इस मामले में अनारकली भी दोषी है तो उसने लाहौर के अपने महल की दीवार में अनारकली को ज़िंदा चिनवा दिया. एक जीते-जागते इंसान को दीवार में चिनवा देना सज़ा देने का एक अनोखा तरीका ही कहा जा सकता है. इसी जगह पर बादशाह बनने के बाद सलीम ने अनारकली का मकबरा बनवा दिया.

बिमारी की वजह से अनारकली की जान गयी

नूर अहमद चिश्ती की एक पुस्तक ‘तहकीकात-ए-चिश्तियां’ के अनुसार अकबर, अपनी सभी रानियों की अपेक्षा अनारकली से बेपनाह मुहब्बत करता था. इस वजह से बाकी रानियां अनारकली से नफरत करती थी. सितंबर 1599 में अकबर को 80 हज़ार सैनिकों के साथ युद्ध के लिए डेक्कन जाना पड़ा, और इधर महल में सभी रानियां, अनारकली के खिलाफ षड़यंत्र करने लगी जिस वजह से अनारकली बीमार हो गयी और इसी बिमारी की वजह से उसकी जान चली गयी.

सलीम अनारकली पर काल्पनिक कहानी

अनारकली, अकबर की पत्नी थी, कोई कनीज़ नहीं. बाद में साहित्यकारों ने इसे एक काल्पनिक कहानी बना दिया, जिसमे सलीम अनारकली को एक प्रेमी-प्रेमिका दिखाया गया है. सलीम अनारकली की प्रेम कहानी सबसे पहले ‘गुज़िश्ता लखनऊ’ के लेखक अब्दुल हलीम शरर ने लिखी थी. पुस्तक की शुरुआत में ही उन्होंने लिखा कि यह रचना पूरी तरह काल्पनिक है.

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अब्दुल हलीम शरर के बाद 1922 में इम्तियाज़ अली ताज, जो आगा हश्र कश्मीरी के बाद के दौर के सबसे बेहतर नाटककार थे. उन्होंने सलीम अनारकली के किरदार पर एक नाटक लिखा, जो बहुत मशहूर हुआ और इसे लोगों ने काफी पसंद भी किया. इसी नाटक के बाद सलीम अनारकली की प्रेम कहानी को इतनी शोहरत मिली, जिसे बाद में ‘अनारकली’ और ‘मुगले आज़म’ नाम की फिल्मों के रूप में दिखाया गया जो सलीम अनारकली की अमर प्रेम कहानी की वजह बनी.

अनारकली कौन थी और कहाँ से आयी थी ?

अनारकली कौन थी और कहाँ से आयी थी

ऐसा माना जाता है कि अनारकली ईरान से आई थीं. उसका असली नाम नादिरा बेगम था, उसे शर्फुन्निसा भी कहा जाता था. अनारकली ईरान से व्यापारियों के कारवां के साथ लाहौर आयी थी. वह इतनी हसीं और खूबसूरत थी कि उसकी खूबसूरती के चर्चे दूर-दूर तक होने लगे. जब उसकी असीम सुंदरता की खबर अकबर तक पहुंची, तब उसे बादशाह के दरबार में तलब किया गया. उसकी सुंदरता से अकबर बहुत प्रभावित हुए और उसका नाम अनारकली रख दिया.

सलीम अनारकली के प्रेम की निशानी अनारकली का मकबरा

लाहौर में एक बाजार है जिसका नाम अनारकली बाजार है. इस बाजार का नाम अनारकली बाजार इसलिए पड़ा क्योंकि किसी जमाने में यहाँ अनारकली का एक मकबरा हुआ करता था. अनारकली की इस कब्र पर दो तारीखें अंकित थी, जिसमे से एक थी 1599. क्योंकि अनारकली की मौत 1599 में ही हुई थी और दूसरी तारीख 1615, मकबरे का बनकर तैयार होने की तारीख है. मकबरा अकबर के मरने के बाद तैयार हुआ था क्योंकि 1605 में अकबर की मौत हो चुकी थी. इस मकबरे के बनने के 12 साल बाद ही सन 1627 में सलीम का निधन हो गया था.

सलीम अनारकली के प्रेम की निशानी अनारकली का मकबरा

वक्त गुजरता गया, सैकड़ों सालों बाद मुग़लों का शाशन समाप्त हुआ. मुग़लों के बाद सन 1800 में महाराजा रंजीत सिंह की सेना ने इस मकबरे पर कब्ज़ा कर लिया, फिर बाद में अंग्रेजों ने इसे चर्च बनाया. अंग्रेजों के जाने के बाद उसे पंजाब के रिकॉर्ड ऑफिस में बदल दिया गया.

सलीम का जन्म और उसकी पहली शादी

सलीम अनारकली की दास्तान ख़त्म होने से पहले आपका सलीम की जन्म के बारे में भी जानना चाहिए. दरअसल अकबर की कई रानियाँ थी, लेकिन संतान किसी से भी नहीं हो रही थी. कई मन्नतें और दुआओं के बाद जोधाबाई से सलीम का जन्म हुआ. अकबर ने अपने बेटे का नाम सलीम इसलिए रखा था क्योंकि सलीम का जन्म सूफी संत शेख सलीम सुलतान चिश्ती के कानखाह में हुआ था. सलीम को अकबर प्यार से शेखू बाबा कहकर भी पुकारा करते थे.

सलीम का जन्म मुग़लों के लिए एक शगुन माना जा रहा था, क्योंकि सलीम के जन्म के बाद अकबर की सभी रानियों की गोद भरने लगी थी. सलीम की पहली शादी सिर्फ 15 साल की उम्र में ही आमेर के राजा भगवान दास की पुत्री, राजकुमारी मानबाई से करा दी गई थी. इसके बाद वक्त गुज़रता गया और गुज़रते हुए वक्त के साथ सलीम की कई अलग-अलग शादियाँ होती रही. सलीम की शादियों का सिलसिला उसके सिंहासन पर बैठने के बाद भी चलता रहा.

अकबर की मौत के बाद सलीम सिंहासन पर बैठा और बन गया सलीम से मुगल सम्राट जहाँगीर. कम लोगों को ही इस बात की जानकारी है कि जहांगीर ही सलीम था. जहाँगीर का पुत्र शाहजहाँ था, जिसने अपने पिता के तर्ज पर ही अपनी पत्नी की याद में एक मकबरा बनवाया था, जिसे हम ताजमहल के नाम से जानते हैं. ताजमहल को सलीम अनारकली के प्रेम की निशानी अनारकली के मकबरा के तर्ज पर ही बनवाया गया था, लेकिन उससे अधिक भव्य था वो.

अनारकली की मौत का सच 

सलीम अनारकली की प्रेमकहानी का अंत और अनारकली की मौत का सच अभी भी एक प्रश्न चिन्ह है. एक तरफ नूर अहमद चिश्ती के मुताबिक अनारकली की मौत की वजह उसकी बीमारी थी. दूसरी तरफ फिंच के अनुसार अनारकली की मौत दिवार में चिनवाने की वजह से हुई थी. दोनों इतिहासकारों में, फिंच की बात के सच होने की संभावना अधिक है क्योंकि अनारकली के मरने के कुछ सालों बाद ही फिंच हिंदुस्तान आया था.

मुग़ल-ए-आज़म में सलीम अनारकली की कहानी

इतिहासकारों के अनुसार सलीम अनारकली के बीच माँ-बेटे का सम्बन्ध था. अब सवाल उठता है कि हिन्दी सिनेमा इतिहास की सबसे सफल फिल्म मुग़ल-ए-आज़म में सलीम अनारकली की कहानी को बदलकर, तथ्य से बिलकुल अलग क्यों दिखाया गया? ऐतिहासिक फिल्म मुग़ल-ए-आज़म में सलीम अनारकली की प्रेमकहानी में अनारकली को महज़ एक कनीज के रूप में दिखाया गया है. इस फिल्म के अनुसार सलीम अनारकली के प्रेम को अकबर सिर्फ इसलिए स्वीकार नहीं कर पा रहा था क्योंकि अनारकली अकबर के दरबार में एक नाचनेवाली कनीज थी.

मुग़ल-ए-आज़म में सलीम अनारकली की कहानी

सलीम अनारकली की कहानी को फिल्मकारों ने क्यों बदला 

सलीम अनारकली की प्रेमकहानी पर बनायी गयी यह फिल्म कई वर्षों में बन कर तैयार हुई थी. इस फिल्म के लिए निर्देशक के. आसिफ़ ने अपना सब कुछ दाव पर लगा दिया था. कहा जाता है कि सलीम अनारकली की प्रेमकहानी पर बनी इस फिल्म में निर्माताओं ने अपना घर तक गिरवी रख दिया था. अब सवाल उठता है कि जब इसे बनाने में इतने लोगों ने अपना सबकुछ  दाव पर लगा दिया था तो फिर कहानी को बदला क्यों गया ?

ऐसा कहा जाता है कि सलीम अनारकली की इस कहानी को निर्माताओं ने इसलिए दूसरी कहानी में तब्दील किया था क्योंकि सलीम अनारकली की मुहब्बत में, माँ-बेटे का सम्बन्ध दिखाना समाज स्वीकार नहीं कर पाता. इसलिए इस कहानी को एक अलग नाटकीय रूप देकर, सलीम अनारकली की कहानी को फिल्मी रूप दे दिया गया.

 

Source : Dawn, Amarujala and The Hindu.

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