हर पति की इच्छा होती है कि वो अपनी पत्नी का रोल मॉडल बने. उसके पति से अच्छा उसे कोई भी ना लगे और वो कहे कि ‘स्वीटू, दुनिया के सारे पतियों को परफेक्ट हस्बैंड बनने के लिए सिर्फ तुम से सीखना चाहिए’.

हर पति की चाहत होती है की उसकी पत्नी हमेशा उसपर फ़िदा रहे.

पर पत्नी को फ़िदा करने के लिए जनाब का सॉफ्ट और मासूम होना ही काफी नहीं है. महिलाओं और उनके प्यार को जीतने के लिए रूप-रंग की तुलना में कुछ और भी बातों की अधिक आवश्यकता है.

एक्सपर्ट्स के द्वारा कुछ दिशानिर्देशों की रूपरेखा – कैसे महिलाओं के साथ व्यवहार करना चाहिए.

हर महिला के अपने विचार, अपने लक्ष्य होते हैं, और इन बातों का सम्मान करना सभी की रेस्पॉन्सिबिल्टी है.

महिला के पास भी  मस्तिष्क है. उनके विचारों को सुनें और इन्हे याद भी रखें, उनके विचारों की सराहना करना तो बिलकुल भी न भूलें.

पत्नी जी की बातें किसी और से करने से बेटर है, खुद उन्ही से किये जाए.

किसी भी बात के लिए उन्हें कभी कोई दवाब न दें. और हाँ अगर आप बॉस हैं तो बाहर के हैं, घर पर तो आपकी प्यारी गुड़िया…

भरपूर प्यार करने वाली…

एक माँ की तरह आपका ध्यान रखने वाली… आपकी पत्नी है. कुछ भी ऐसा न कराएं जो वो नहीं चाहती.

किसी बात पर अगर पत्नी जी की सलाह मश्वरा लिए जाएँ, उन्हें भरपूर बोलने का हक़ मिले, जो वो हमेशा चाहती हैं. तो क्या नज़ारा होगा… !

वैसे हम सब जानते हैं की एक वक्ता होने से बेहतर है एक श्रोता होना. तो क्यों न कोई भी निर्णय लेने से पहले उनकी भी विचार लिए जाए. क्या पता हम से बेहतर निर्णय हो उनके.

हमेशा वफादार रहें, कभी कुछ भी न छुपाएं उनसे.

अपनी भावनाओ और उनकी भावनाओ की समझ अगर दोनों को हो तो क्या बात है.

गलतियां इंसान से ही होती है, और पत्नी को भी अच्छा लगता है जब उसका पति अपनी गलती पर माफ़ी मांगे.

हमे याद रखने की जरूरत है हमें की पत्नी एक रिश्ता है. और वो रिश्ता पत्नी के रूप में एक इंसान से है. हर इंसान के अलग-अलग पसंद, अलग दिलचस्पी, अलग भावनाएं है. उन्हें भी अच्छा लगता है अपने दोस्तों से खूब बातें करना. उनके मनपसंद तरीकों से उन्हें अपनी ज़िन्दगी जीने का हक़ है.

उनकी समस्याओं के प्रति संवेदनशील रहें. उनकी मदद करके हम उन्हें एक एहसास दिला सकते हैं की हम हर वक्त उनके साथ हैं.

उन्हें उनके रियल नाम से न बुलाकर, अगर खुद से दिए गए एक नाम से बुलाये तो बात ही कुछ और होगी. हमारे व्यवहार में उनके प्रति आदर, केयर और ट्रस्ट हो तो बहुत ही अच्छा है.

पत्नी से कभी किसी की तुलना न करें. उनकी तुलना खुद से तो बिलकुल न करें. दोनों के ही अलग-अलग गोल्स हैं. अगर उनकी क्वालिफिकेशन या जॉब हमसे बेहतर है तो इसमें बिलकुल भी किसी तरह की कोई बुराई नहीं बल्कि ये तो अच्छी बात है की हमारे घर में हमारा एक बेहतर साथी है जो हम से भी आगे और अधिक पावरफुल है.

पत्नीजी के साथ फन्नी बातें भी कभी-कभी हो जाए. उन्हें कभी बोर न होने दे, अगर ऐसा है तो हसिये और उन्हें भी खूब हंसाइए.

पत्नी को कभी हाउसकीपर यानि नौकरानी समझने की भूल न करें. घर के सोफे को त्याग कर उनके रसोई में उनके साथ खाना बनायें, घर की सफाई और कपडे की धुलाई भी साथ-साथ दोनों मिलकर करे. हमें याद रखने चाहिए की शादी एक समान भागीदारी है. पति-पत्नी के प्यार की निशानी उनके घर के नन्हे सदस्य के रूप में आते हैं तो उनकी देख-रेख की जिम्मेदारी दोनों की ही होने चाहिए, जैसे – बच्चे का डायपर चेंज करना, बच्चे की साफ़-सफाई का ध्यान रखना, दूध पिलाना या फिर आधी रात को नींद से जागकर बच्चे को देखना.

हमारे ब्लॉग के माध्यम से एक और निवेदन – पत्नी से कभी भी सेक्स के लिए जबरदस्ती ना करें. उनके ‘ना’ का मतलब सिर्फ ‘ना’ होता है.

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