क्या sexual desires यानी सेक्स की इच्छा महिलाओं में भी होती है? है न अजीब सा सवाल! महिलायें भी पुरुषों की तरह इंसान हैं. महिलायें भी पुरुषों की तरह सोती है, जागती हैं, हंसती हैं, बोलती हैं. फिर यह कैसा सवाल ? आचार्य चाणक्य के अनुसार महिलाओं में सेक्सुअल एक्टिविटी के लिए पुरुषों की तुलना में 8 गुना अधिक sexual desires होती है. लेकिन, इस तरह के मासूम सवालों का मन में आना भी स्वाभाविक है. खासकर जब महिलायें अपने पुरुष पार्टनर का सहयोग नहीं कर पाती हैं, उस वक्त मन में इसी तरह के सवाल आते हैं.

सेक्स के प्रति महिलाओं के उदासीन होने पर इस तरह का भ्रम होना भी स्वाभाविक है, क्योंकि महिलाएं पुरुषों की तरह अपनी इच्छाएं व्यक्त नहीं कर पाती हैं. इसके पीछे कारण यह नहीं है कि महिलाओं में sexual desires  यानी सेक्स की इच्छा कम होते हैं, बल्कि वजह ये हैं :

Sexual Desires  के लिए Emotionally Relaxed  होना जरूरी है

महिलायें भावुक होती है. वे अपनी sexual desires  यानी सेक्स की इच्छा अभिव्यक्त तभी कर पाती हैं जब वह पार्टनर के साथ इमोशनली रिलैक्स्ड और प्यार महसूस करती हैं. यदि आप महिला को खुश रखते हैं और उसका सम्मान करते हैं, तो वह बिस्तर पर काफी खुल कर साथ देंगी.

Sexual Desires  और व्यस्तता

महिलायें तनावग्रस्त जल्दी होती हैं. आजकल महिलायें घर के काम-काज के अलावा, एक प्रोफेशनल के रूप में बाहर का काम भी सम्भालतीं हैं. घर-बाहर के काम की व्यस्तता में भी कई बार सेक्स के प्रति उनका ध्यान नहीं जा पाता है.

Sexual Desires महिलाओं में भी होती है सेक्स की इच्छा

Sexual Desires  पाप है

हमारे समाज में लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग मानसिकताएं हैं. एक तरफ जहाँ लड़कों को सबकुछ बोलने की या अभिव्यक्त करने की आजादी है. वही दूसरी तरफ महिलाओं के लिए बिलकुल अलग धारणा है. हमारे समाज में एक कहावत है ‘शर्म औरत का गहना होता है’. बचपन से हमें सिखाया जाता है कि जो महिलायें अपनी sexual desires अभिव्यक्त करती हैं उनका कैरेक्टर अच्छा नहीं माना जाता. बचपन से उन्हें धार्मिक प्रथाओं के माध्यम से सिखाया गया है कि सेक्स की इच्छा यानि sexual desires महिलाओं के व्यक्त करने के लिए अनुचित और पाप हैं.

जेंडर साइकोलोजिस्ट एंड प्ले एक्सपर्ट ईवा ग्लासरूद कहती हैं “अलग-अलग लोगों के अलग-अलग एनर्जी है. कुछ लोग अपने काम के अलावा पूरे दिन स्पोर्ट्स पसंद करते हैं, इसके अलावा कुछ नहीं करना चाहते हैं. कुछ अपना काम और स्पोर्ट्स के अलावा सेक्स भी पसंद करते हैं. कुछ लोग सिर्फ सेक्स के लिए ही अपना पूरा वक्त देना पसंद करते हैं. अलग-अलग लोगो के लिए सेक्स अलग-अलग मायने रखता है. कुछ लोगों को सेक्स ही पसंद है और उनके लिए सेक्स ही सबकुछ है. कुछ के लिए गहरी इमोशनल कनेक्शन या कमिटमेंट के बिना सेक्स कुछ भी नहीं है”.

Sexual desires पर यूनिवर्सिटी ऑफ़ लंदन की आस्था कौशिक कहती हैं “यह कोई रॉकेट साइंस नहीं है. Sexual desires हम में भी है और कभी-कभी हमारे पार्टनर से भी ज्यादा. यह स्वाभाविक है. कई वर्षों के धार्मिक ब्रेन वाश के कारण हमें इस बात पर विश्वास दिलाया जाता हैं कि महिलाओं में ऐसी इच्छा नहीं होने चाहिए, और यही वजह है कि हम महिलायें इसे व्यक्त नहीं कर पाती. भारतीय समाज में female sexuality के बारे में बात करना शर्म की बात मानी जाती है. अजीब बात है कि 2017 में भी ऐसे इम्पोर्टेन्ट सब्जेक्ट को अनैतिक माना जाता है”.

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