Teenage love से निपटने के लिए, कोई भी parenting बुक हमें पूरी तरह से मदद नहीं कर सकता. लेकिन parents के लिए यहां कुछ  tips दिए गए हैं. जिनसे उन्हें जरूर मदद मिलेंगी. स्कूल-कॉलेज के दिनों में हुआ प्यार और रिलेशनशिप के मामलों के लेकर होने वाले रिसर्च में एक बात सामने आई है. कि teenage अवस्था में अक्सर opposite sex के प्रति आकर्षण बढ जाता है. यह आकर्षण किसी के भी प्रति हो सकता है. जिसे वे प्यार समझ बैठते हैं. उनके इस तथाकथित प्यार की न कोई बुनियाद होती है और न ही उसमें कोई परिपक्वता होती है. नई उम्र का जोश जुनून में बदल जाता है. जिसका नतीजा अच्छा नहीं होता.

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इस दौरान शरीर और हार्मोन्स के बदलाव के कारण युवाओं में मानसिक बदलाव आने लगते हैं. वह अति भावुक और संवेदनशील हो जाता है. स्वाभाविक तौर पर जननांग विकसित होने के साथ-साथ सेक्स के प्रति इच्छाएं भी बढ़ने लगती हैं. ऐसे समय में parents की ज़िम्मेदारी और भी बढ़ जाती है. यदि वे इस समस्या को समझने की कोशिश करें, तो इसे handle करना इतना मुश्किल भी नहीं.

Teenage में होने वाला प्यार, बाहरी ख़ूबसूरती और चार्म की तरफ ज्यादा झुकाव महसूस करता है. अपने इसी आकर्षण को प्यार मान कर वे आगे बढ़ने लगते हैं. लेकिन यदि वह उनकी अपेक्षाओं पर खरा न उतरा तो बहुत जल्दी ही यह आकर्षण खत्म भी हो जाता है. ऐसे सम्बन्ध को तो सिर्फ आकर्षण ही कह सकते हैं.

शुरुआत के दिनों में इस तरह की रिलेशनशिप को ले कर बहुत सीरियस हो जाते हैं. एक-दूसरे के साथ वक्त बिताना बहुत अच्छा लगता है. एक-दूसरे से उनकी उम्मीदें बढ़ जाती है. वे सोचने लगते हैं कि उनका साथ जीवन भर रहेगा. बढ़ती उम्र के साथ जैसे-जैसे समझदारी आती है और उनके विचारों में परिपक्वता आने लगते हैं. फिर उन्हें सही और गलत का एहसास होने लगता है.

यह सुनिश्चित करने के लिए कि हमारा teenage बच्चा, किसी इस तरह के प्यार-व्यार वाले गतिविधयों में है या नहीं. जो जानकारी मिली है सच भी है या महज एक शरारती अफवाह. इसके लिए हमें उनके साथ घुल-मिल कर रहना होगा.

अपने बच्चे का कभी उपहास न करें. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उसने अच्छा किया है या बुरा किया है. सच्चाई यह है कि बच्चे की भावनाएं वास्तविक हैं. इसका सम्मान करते हुए इस मैटर का हल निकालें.

इस विषय पर अगर हम teenagers पर आक्रामक रुख रखेंगे तो यह और भी घातक होगा.

इस विषय पर उपदेश देने से बचें. क्योंकि इस उम्र में ऐसी बातें teenagers को सँभालने के लिए काफी नहीं है. ऐसे वक्त में ज़रूरत होती है उन्हें समझने की और समझाने की.

अपने teens से इस बारे में बातचीत करें. बात करें कि वे किससे प्यार करते हैं. उनके संबंध में किस तरह का व्यक्ति है? प्यार से जानने की कोशिस करें कि जिनके प्यार में हैं, उसमे ऐसी क्या खास बात है? उन्हें एहसास कराएं कि घरवालों से भी कोई अधिक प्यार कैसे कर सकता है!

आपके teenage बच्चे के साथ विश्वास का रिश्ता बनाएं. यह महत्वपूर्ण है. क्योंकि जितना अधिक आपके किशोर आप पर भरोसा करेंगे. उतना ही वे अपने नए रिश्ते के बारे में आप से बात करना सहज महसूस करेंगे.

ध्यान रखने की जरूरत है कि यह उम्र का नाज़ुक मोड़ है. ऐसे में ज़रूरत है हमें अपनी व्यस्तता से निकलकर गम्भीरतापूर्वक   उन पर ध्यान देने की. उनकी भावनाओं को समझने की.

Parents को चाहिए अपने teenagers के साथ, पहले प्रेम के अपने अनुभवों की चर्चा करें. इससे उन्हें शायद कुछ सबक मिल सकें और उनका ध्यान बदले.

अपने किशोरों के प्रेमी या प्रेमिका के आसपास अपनी उम्मीदों पर चर्चा करें.

Parents को पता नहीं लग पाता है कि उनके teenage बच्चे, कैसे– कैसे लोगों से मिलते हैं. इसलिए बेहतर तो यह है कि उनसे बातें किये जाए कि बाहर किस-किस से आज मुलाक़ात हुई? उनसे क्या-क्या बातें हुई? ध्यान रहें सिर्फ बातें करें, जासूसी नहीं.

बच्चों को सामाजिक और नैतिक मूल्यों का महत्व बताये.

ध्यान रखिये एक सकारात्मक सोंच में बहुत दम होता है. विस्वास के साथ संयम बरतते हुए हम अपने teenage बच्चों को सही राह पर ला सकते हैं. उनके भटके हुए कदम, उनके teenage love को इसी तरह handle कर सकते हैं. पर प्यार से और सिर्फ प्यार से.

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