Valentine Day kyu manate hai.

Valentine Day क्यों मनाया जाता है ? क्या यह हमारी संस्कृति के विरूद्ध है ?

Valentine Day, प्रेमियों के लिए एक बेहद खूबसूरत दिन माना जाता है. मोहब्बत के इस खास दिन में कोई गलती न हो जाए इसलिए यह समझना ज़रूरी है कि Valentine Day क्या होता है ? Valentine Day क्यों मनाया जाता है ? क्या महत्व है Valentine Day का इत्यादि… जैसा कि आप जानते हैं कि यह बेहद खास दिन दिल से दिल को जोड़ने के लिए मनाया जाता है. रूठे यार को मनाने के लिए मनाया जाता है. नफरत की दूरियों को मिटाने के लिए मनाया जाता है. Valentine Day एक बहाना है इंसान को इंसान से जोड़ने का. एक बेहद खूबसूरत मौका है अपनी मोहब्बत का प्रस्ताव रखने का. मन में दबी हुई चाहत का इज़हार करने का एक बेहतर बहाना है Valentine Day. जो कभी न कह सकें उन बातों को ज़ाहिर करने का सुन्दर माध्यम है Valentine Day.

लेकिन शायद आप नहीं जानते होंगें कि 14 फरवरी को ही क्यों मनाया जाता है Valentine Day. इस दिन का नाम Valentine Day ही क्यों पड़ा, शायद नहीं जानते हों. अगर आपको जानकारी है तो कमेंट के माध्यम से आप भी बताएँ. Valentine Day क्यों मनाया जाता है, इस विषय पर कई दन्त कथाएँ हैं. इंटरनेट पर काफी ढूंढने पर यही समझ में आता है कि उन कथाओं का कोई ठोस प्रमाण कही नहीं है. हो सकता है कोई ठोस प्रमाण हो भी जिन्हें हम नहीं जान सके हों, लेकिन एक्सपर्ट्स ने भी इस बात की पुष्टि नहीं की है कि इसकी असल वजह क्या रही है और इसे मनाने की प्रथा कब से चली आ रही है. फिलहाल हम जितना जान पाए हैं उतना आपसे शेयर कर लें.

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Valentine Day क्यों मनाया जाता है ?

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इस तरह की मान्यता रही है कि रोम के एक पादरी संत Valentine के नाम पर Valentine Day मनाया जाता है. संत Valentine रोम के एक चर्च में पादरी थें. बताया जाता है कि रोम का साशक क्लाउडियस शादी विवाह के मामले में एक बेहद क्रूड और भद्दा विचार रखता था. क्लाउडियस का ऐसा मानना था कि विवाहित लोग शक्ति विहीन होते हैं और परेशान रहते हैं. वह चाहता था कि उसके सैनिक अपना पूरा वक्त अपने काम को दें और शारीरक रूप से हृष्ट-पुष्ट रहें, इसलिए उन्हें शादी करने की अनुमति नहीं थी. अपने सैनिकों के प्रति क्लाउडियस के ऐसे क्रूड रवैये से उसके सैनिकों साथ रोम की प्रजा भी दुखी रहती थी. क्लाउडियस की ऐसी तानाशाही से संत Valentine भी बहुत दुखी थें.

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वे चाहते थे कि हर इंसान अपनी ज़िन्दगी में खुश रहे और शादी-विवाह करके एक खुशहाल पारिवारिक जीवन जिये, इसलिए सैनिकों को वे शादी करने के लिए प्रेरित करने लगें और धीरे-धीरे सभी सैनिक शादी करने लगें. यह बात जब क्लाउडियस तक पहुँची तो उसने संत Valentine को 14 फरवरी को फाँसी पर लटका दिया. कहा जाता है कि फाँसी चढ़ने से पहले उन्होंने जेलर की अंधी बेटी को अपना नेत्र दान कर दिया था. उनकी मौत के बाद उस अंधी लड़की को आँखें मिल गयी थी, जिन आँखों से उसने संत Valentine द्वारा उसके लिए लिखा पत्र पढ़ा था. पत्र के आख़री में लिखा था ‘तुम्हारा Valentine’. इंसानों के लिए संत Valentine का प्रेम और त्याग की ऐसी भावनाओं को यादगार बनाए रखने के लिए 14 फरवरी को प्रेम का प्रतीक मानते हुए Valentine Day मनाया जाने लगा.

क्या Valentine Day सिर्फ लवर्स मनाते हैं ?

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बहुत से लोगों का ऐसा मानना है कि Valentine Day सिर्फ लवर्स के लिए होता है. जानकारी के अभाव में ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो Valentine Day को रोमांस के रूप में देखते हैं, और उनका मानना है कि यह दिन प्रेमी-प्रेमिकाओं के लिए ही है जबकि उनकी यह अवधारणा बिलकुल गलत है. हाँ यह बात बिलकुल सही है कि यह प्रेम का त्यौहार है. लेकिन क्या प्रेम को सिर्फ रोमांस के रूप में देखना उचित होगा ? इंसान का प्रेम किसी भी जीव के लिए हो सकता है, तो क्या जीवों के प्रति इंसान का प्रेम रोमांस है ? नहीं न ! प्रेम की भावनाओं में ईश्वर का वरदान है. इसे सिर्फ रोमांस से जोड़ना शायद उचित नहीं होगा. अगर हम ऐसी सोच रखते हैं कि Valentine Day सिर्फ लवर्स मनाते हैं, तो इस सोच में सुधार लाने की ज़रूरत है हमें.

क्या Valentine Day किसी विशेष धर्म का त्यौहार है ?

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ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो ये मान कर बैठे हैं कि यह त्यौहार किसी एक विशेष धर्म या समुदाय से जुड़ा त्यौहार है. Valentine Day को किसी विशेष धर्म से जोड़ने वाले लोग बिल्कुल सही हैं. यह त्यौहार हर उस विशेष धर्म से जुड़ा है जिस धर्म में प्रेम को ईश्वर माना जाता है. रही बात अगर नाम पर किसी को आपत्ति है तो नाम बदल कर भी इस प्रेम के त्यौहार को मनाया जा सकता है. चूँकि Valentine ईसाई धर्म के पादरी थे इसलिए दूसरे धर्म को इस पर आपत्ति हो सकती है. इस आपत्ति के पीछे उनकी भावनाएँ अपनी जगह बिल्कुल दुरुस्त हैं. तो क्या इस प्रेम के त्यौहार को बंद कर देना चाहिए ? क्या बंद करने से बेहतर यह नहीं होगा कि अपने-अपने धर्म के अनुसार इसके नाम में परिवर्तन कर लिया जाए !

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दुनिया में चारों तरफ नफ़रत रूपी ज़हर का क़हर प्रलय बनकर विनाश करता जा रहा है, ऐसी स्थिति में प्रेम करने का कोई त्यौहार है तो क्यों ना इसे और बढ़ावा दिया जाए ! नाम पर आपत्ति है तो नाम कुछ भी हो, हमें तो ज़रूरत प्रेम की है. प्रकृति की रक्षा करने के लिए मोहब्बत की सख्त ज़रूरत है. नफ़रत के ज़हर को बेअसर करने के लिए प्रेम की बेहद ज़रूरत है. हो सकता है हमारी सोच गलत हो, लेकिन हमें गलत साबित करने से पहले एक बार ज़रूर विचार कीजियेगा… इस विषय पर एक बार चिंतन करके देखिएगा.

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क्या Valentine Day भारतीय संस्कृति के विरूद्ध है ?

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संस्कृति कोई भी हो, सभी की बुनियाद प्रेम और संस्कार की धरातल पर विराजमान है. यह मान कर इसकी अवहेलना करना कि Valentine Day किसी दूसरी संस्कृति को मानने वालों का त्यौहार है और यह भारतीय संस्कृति के विरुद्ध है, तो माफ़ कीजिये ऐसी मानसिकता को बदल डालने की ज़रूरत है हमें. हमारी भारतीय संस्कृति से प्रेरणा लेकर ही पश्चिमी संस्कृति में सुधार किये गए हैं. भारत की धरती से ही प्रेम का सन्देश विश्व भर में फैला है.

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कृष्ण और राम की इस पावन धरती से विश्व प्रभावित रहा है. प्रेम का ज्ञान बुद्ध को हमारी ही धरती पर प्राप्त हुआ था जिसे कई देश मानते आ रहे हैं. जो देश विश्व भर में प्रेम को निर्यात करता आ रहा हो भला वह देश प्रेम की अवहेलना कैसे कर सकता है ! जिस संस्कृति में मीरा का विष भी अमृत बन जाए उस संस्कृति में प्रेम का निरादर कैसे हो सकता है ! सोच कर देखिये कि इसकी अवहेलना करके, जाने-अनजाने में क्या हम अपने ही संस्कारों का निरादर नहीं कर रहे हैं !

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Valentine Day को हम क्यों स्वीकार करें ?

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Valentine Day को स्वीकार करने से पहले, यह स्वीकार कर लें कि ग्रहण करना हम मनुष्यों के स्वभाव में है. अगर ऐसा नहीं होता तो हम भारत को इंडिया नहीं कहते. इसे स्वीकार करने से पहले यह सोचना भी ज़रूरी है कि मोबाइल किसकी देन है. अंग्रेज़ी में कुछ लिखने-पढ़ने से पहले यह ध्यान दें कि Valentine Day की ही तरह यह भी विदेशी है. किसी की अच्छाइयों को स्वीकार करना गलत नहीं है तो Valentine Day को स्वीकार करने में कैसी आपत्ति ? हमारा धर्म या हमारे संस्कार प्रेम से नफ़रत करना नहीं सिखाते हैं. जब मौत बाँटने वाले हथियारों को हम विदेशियों से स्वीकार कर सकते हैं तो प्रेम के इस त्यौहार को स्वीकार करने में क्या हमें आपत्ति होनी चाहिए !

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Valentine Day हो या कोई भी डे, हमें तो प्रेम को स्वीकार करने से मतलब है. प्रेम का यह त्यौहार Valentine Day देशी हो या विदेशी, हमें तो प्रेम का बहाना चाहिए. Valentine Day का नाम बदलकर जो भी रख लें, लेकिन नफ़रत हमें स्वीकार नहीं. हमारा संस्कार प्रेम की बुनियाद पर टिका है, भले ही वह प्रेम Valentine Day के माध्यम से ही क्यों न मिले. प्रेम का प्रतिक है Valentine Day नफ़रत का नहीं, इसकी वजह सिर्फ मोहब्बत ही बने नफ़रत नहीं.

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